मकर संक्रान्ति से पहले क्यों मनाते हैं लोहड़ी का पर्व, कैसे होती है पूजा
Jan13

मकर संक्रान्ति से पहले क्यों मनाते हैं लोहड़ी का पर्व, कैसे होती है पूजा

मकर संक्रान्ति की पूर्वसंध्या पर लोहड़ी का पर्व मनाया जाता है। इस अवसर पर रात में खुले स्थान में परिवार और आस पड़ोस के लोगों के साथ मिलकर आग के किनारे घेरा बना कर पूजा की जाती है। लोहड़ी पौष के अंतिम दिन, सूर्यास्त के बाद माघ संक्रांति से पहली रात को होती है। लोहड़ी मुख्यत: पंजाब का पर्व है। ऐसा लगता है कि इसके प्रत्‍येक शब्द को लोहड़ी की पूजा के समय प्रयोग होने वाली वस्तुओं से लिया गया है, जैसे ल लकड़ी से ओह गोहा मतलब सूखे उपले और...

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जानिए कौन से देवता को कौन सा फूल चढ़ाना शुभ
Dec12

जानिए कौन से देवता को कौन सा फूल चढ़ाना शुभ

भगवान केवल भाव के ही भूखे होते हैं। वे यह नहीं देखते कि भक्त ने उन्हें क्या अर्पित किया है या कैसा अर्पित किया है। इसके बावजूद भक्तों का प्रयास यही रहता है कि प्रभु को हर तरह से प्रसन्न किया जाए। हिंदू धर्म में विभिन्न फूलों का विशेष महत्व है। धार्मिक अनुष्ठान, पूजन, आरती आदि कार्य बिना फूल के अधूरे ही माने जाते हैं। भगवान को वैसे तो कोई भी फूल चढ़ाया जा सकता है। लेकिन कुछ फूल भगवान को बहुत ही प्रिय होते हैं। यदि भगवान को उनकी पसन्द का...

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जानिए शिवलिंग की उत्पत्ति और उसकी महिमा
Dec03

जानिए शिवलिंग की उत्पत्ति और उसकी महिमा

शिवलिंग भगवान शंकर का प्रतीक है। शिव का अर्थ है – ‘कल्याणकारी’। लिंग का अर्थ है – ‘सृजन’। सर्जनहार के रूप में उत्पादक शक्ति के चिन्ह के रूप में लिंग की पूजा होती है। स्कंद पुराण में लिंग का अर्थ लय लगाया गया है। लय ( प्रलय) के समय अग्नि में सब भस्म हो कर शिवलिंग में समा जाता है और सृष्टि के आदि में लिंग से सब प्रकट होता है। लिंग के मूल में ब्रह्मा, मध्य में विष्णु और ऊपर प्रणवाख्य महादेव स्थित हैं।...

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स्कंद षष्ठी व्रत से मिलता है लाभ, इसी दिन हुआ था कार्तिकेय का जन्म
Nov23

स्कंद षष्ठी व्रत से मिलता है लाभ, इसी दिन हुआ था कार्तिकेय का जन्म

नई दिल्ली: शुक्रवार को स्कंद षष्ठी है। इसी दिन मंगल ग्रह के स्वामी और देवताओं के सेनापति कार्तिकेय का जन्म हुआ था। भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में कार्तिकेय को अपना स्वरूप ही माना है। ‘सेनानीनामहं स्कन्द:।’ कार्तिकेय षष्ठी तिथि और मंगल ग्रह के स्वामी हैं। ये दक्षिण दिशा में निवास करते हैं। इन्हें ही षडानन, षड्मुख, गुह, आग्नेय, स्वामिकुमार, मुरुगन, सुब्रह्ममणयम, षरजन्मा और सेनानी भी कहा जाता है। पोर्न स्टार ने पुतिन के ‎खिलाफ चुनाव लड़ने...

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जानिए कैसे शिव अपना घर गंवा बैठे और बदरीनाथ में आकर रहने लगे

देहरादून: भगवान बदरीविशाल के कपाट शीतकाल के लिए रविवार को बंद होंगे। कपाट बंद होने की धार्मिक प्रक्रियाओं के तहत शनिवार को बदरीनाथ मंदिर परिसर में स्थित माता लक्ष्मी के मंदिर में मां लक्ष्मी के अभिषेक पूजन के बाद उन्हें शीतकाल के छह माह के लिए भगवान नारायण के संग विराजमान होने का न्योता दिया गया। भगवान बदरी विशल के कपाट शीतकाल के लिए रविवार को सायं 7.28 मिनट पर बंद कर दिये जाएंगे। बद्रीनाथ हिमालय पर स्थित एक तीर्थ स्थान है। इससे जुड़ी...

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