बेहद खौफनाक: अपने दोस्त की मां-बहन से रेप की कोशिश, पकड़े जाने के डर से जला दिया जिंदा
Feb18

बेहद खौफनाक: अपने दोस्त की मां-बहन से रेप की कोशिश, पकड़े जाने के डर से जला दिया जिंदा

ये गिरते सामाजिक स्तर का ही असर है कि आजकल लोग अपराधिक घटनाओं को अंजाम देते समय रिश्तों और उम्र का भी लिहाज नहीं करते हैं.. रेप वारदात की घटनाएं तो आजकल आम हो गई हैं.. बच्चियों से लेकर बुजुर्ग महिलाएं भी इसका शिकार बन रही हैं। अमृतसर में एक ऐसी ही बेहद शर्मनाक घटना सामने आई है जहां मां बेटी दोनों के साथ रेप करने की कोशिश की गई और फिर पकड़े जाने से बचने के लिए दोनों को जिंदा जला दिया गया । इस वारदात का सबसे शर्मनाक पहलु ये रहा कि...

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आपबीती: …जब सीएम अखिलेश के भक्तों की ट्रॉलिंग का मैंने दिया करारा जवाब
Aug11

आपबीती: …जब सीएम अखिलेश के भक्तों की ट्रॉलिंग का मैंने दिया करारा जवाब

अभियान ‘आपबीती’ के बाद ये तो जाहिर है कि ट्रॉल का शिकार सिर्फ पॉलिटिशियन या फिर सेलिब्रिटी नहीं होते, बल्कि आम इंसान भी इनके शिकंजे में आ सकते हैं. इंडियन लेटर ऐसे ही कई लोगों की आपबीती साझा कर रहा है, जिन्होंने ट्रॉल के खिलाफ आवाज़ उठाई. आज पढ़िए रामांशी मिश्रा की आपबीती, ताकि उनकी आवाज़ तमाम लोगों तक पहुंचे और उन्हें भी अपनी बात कहने के लिए प्रेरणा मिले. मैंने  टीवी न्यूज चैनल का सेमिनार लखनऊ में अटेंड किया था. इसमें पूर्व...

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आप बीती: सच बोला तो मिली गालियों की गोलियां और देशद्रोह की मिसाइलें
Aug10

आप बीती: सच बोला तो मिली गालियों की गोलियां और देशद्रोह की मिसाइलें

बीते दिनों कई बार ऐसा हुआ, जब लोगों को अपनी राय रखना महंगा पड़ा. उन राय में न तो गालियाँ थीं, न किसी के लिए अपशब्द. लेकिन, बावजूद इसके कुछ लोगों को ये नागवार गुजरा और उन्होंने गालियों की झड़ी लगा दी.  ये सब ट्रोलर का कमाल है. आप बीती: सच का साथ देने पर क्या आप भी हुए ट्रॉल देखें वीडियो इंडियन लेटर ने ट्रोलर के खिलाफ एक अभियान की शुरुआत की, जिसका नाम है आपबीती. इसके जरिये हमने लोगों से उनके अनुभव मांगे. लोग न तो डरे और न ही सहमे, बल्कि...

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आप बीती: सच का साथ देने पर क्या आप भी हुए ट्रॉल…? देखें वीडियो
Aug10

आप बीती: सच का साथ देने पर क्या आप भी हुए ट्रॉल…? देखें वीडियो

यूँ तो हमारे देश में अभिव्यक्ति की आज़ादी है, लेकिन कभी-कभी यह ऐसे जंजाल में जकड़ लेती है, जहाँ आप खुद को ठगा हुआ महसूस करते हैं. मधुर भंडारकर की फिल्म ‘इंदु सरकार’ के खिलाफ उन पर कालिख पोतने के बदले ईनाम रखने वाले इसे अभिव्यक्ति की आज़ादी समझते हैं. इसी का फायदा उठाकर आम आदमी के पत्रकार रवीश कुमार का समर्थन करने पर लड़की को रात में हवेली आने का ऑफर दे देते हैं. ये है मेरी कहानी बाकी दिनों की तरह उस दोपहर भी ऑफिस में बीत रही थी. सोशल...

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