70 ट्रांसफर झेले, तीन महीने से नहीं मिली सैलरी, ये है भाजपा सरकार में IAS अफसर का हाल

केन्द्र और राज्य में सरकार किसी भी पार्टी की हो। वह खुद को कितना भी ईमानदार कहे। भ्रष्‍टाचार को खत्म करने के वादे करे, लेकिन सच ये है कि सरकारें नहीं चाहतीं कि भ्रष्‍टाचार खत्म हो। वह खुद इसमें लिप्त हैं। यही वजह है कि जो अफसर भ्रष्‍टाचार से लड़ने का साहस दिखाते हैं, सरकारें उन्हें किसी काम लायक नहीं छोड़ती। हरियाणा के दो आईएएस अफसर सरकार के इसी गुस्से को झेलते आ रहे है। ये हैं अशोक खेमका और प्रदीप कासनी। ताजा मामला आईएएस प्रदीप कासनी से जुड़ा है। उन्हें तीन महीने से वेतन, सरकारी गाड़ी और स्टाफ नहीं दिया गया है। कासनी का रिटायरमेंट फरवरी 2018 में होना है। आखिरी दिनों में हो रहे इस तरह के व्यवहार से प्रदीप काफी दुखी हैं।

आईएएस प्रदीप कासनी

आईएएस प्रदीप कासनी

बता दें कि प्रदीप कासनी 70 ट्रांसफर झेल चुके हैं। उन्हें तीन महीने पहले पर्यावरण विभाग के अधीन आने वाले लैंड यूज बोर्ड का ओएसडी बनाया गया है। इससे पहले वे हरियाणा खादी ग्रामोद्योग बोर्ड में प्रशासक बनाए गए थे। वहां भी उनके पास कोई काम नहीं था। इस तरह के व्यवहार की अति होने पर उन्होंने सेंट्रल एडमिनिस्ट्रेटिव ट्रिब्यूनल (कैट) में शिकायत दर्ज कराई थी। कैट ने हरियाणा सरकार को प्रदीप कासनी का वेतन तत्काल जारी करने का आदेश दिया था। लेकिन सरकार कान में तेल डालकर बैठी रही। कासनी रविवार तक इंतजार करेंगे। फिर सोमवार को दोबारा कैट में शिकायत करेंगे।

1997 बैच के आईएएस अफसर प्रदीप कासनी पहले एचसीएस थे। उनकी पत्नी नीलम प्रदीप कासनी भी सीनियर आईएएस रही हैं और राज्यपाल के एडीसी पद से हाल ही में रिटायर हुई हैं। मूल रूप से भिवानी जिले के रहने वाले प्रदीप कासनी और उनकी पत्नी नीलम प्रदीप कासनी साहित्यकार भी हैं।


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Author: Vatsaly

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