16 सालों में खाली हो गए उत्तराखंड के तीन हजार गांव

देहरादून: राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग ने उत्तराखंड के पहाड़ों से बढ़ते पलायन पर चिंता जतायी है। उत्तराखंड के गठन को सिर्फ 16 साल ही बीते हैं, लेकिन इस दौरान प्रदेश के कुल 16,793 गांवों में से 3 हजार गांव पूरी तरह खाली हो चुके हैं। इस समय ढाई लाख से ज्यादा घरों में ताले लटके हुए हैं। इससे पहाड़ की पीड़ा समझी जा सकती है।

नहीं बचेंगे काले धन वाले, पीएम मोदी ने बनाया नया नियम

उत्तराखंड राज्य के अल्मोड़ा जिले में खाली पड़े घरों की संख्या सबसे अधिक 36,401 और जबकि दूसरे स्थान पर रहे पौड़ी जिले में 35,654 है। टिहरी और पिथौरागढ़ जैसे जिलों की स्थिति भी ज्यादा बेहतर नहीं है। टिहरी में 33,689 और पिथौरागढ़ में 22,936 घरों में ताले लटके हुए हैं। देख-रेख के अभाव में ये घर खंडहरों में तब्दील हो रहे हैं। उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में हो रही इस दुर्दशा के लिए मानवाधिकार आयोग ने राज्य सरकार और उनकी नीतियों को जिम्मेदार ठहराया है।


हमसे फेसबुक पर भी जुड़ें!


देहरादून में संपन्न राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के दो दिवसीय समारोह के समापन अवसर पर आयोग के सदस्य और न्यायाधीश पी. सी. घोष, डी. मुरुगेशन और ज्योति कालरा ने अफसरों के साथ बैठक भी की। आयोग के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं होने के कारण यह नौबत आई है।

असम में बाढ़ की स्थिति बनी गंभीर, बाढ़ से मरने वालों की संख्या 59 हुई

आयोग ने इस पर अफसरों से जवाब भी मांगा। आयोग के सदस्यों ने कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाएं मनुष्य की मूलभूत आवश्यकता है, लेकिन विडंबना ही है कि सरकारें इन सेवाओं को उपलब्ध कराने में नाकाम रही हैं। आयोग ने कहा कि सरकारी अस्पतालों में डॉक्टर, नर्स, पैरा मेडिकल स्टाफ और विशेषज्ञ चिकित्सकों की जबर्दस्त कमी है। इससे आम लोगों को बुनियादी सुविधाएं और उचित इलाज तक नहीं मिल रहा है।

उन्होंने इस दिशा में आवश्यक सुधार करने के निर्देश दिए। इसके अलावा उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं की दिशा में भी कोई प्रगति न होने पर भी निराशा व्यक्त की।

loading...

Author: Vineet Verma

Share This Post On

Submit a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

X
loading...