सीप से मोती की खेती करके सत्यनारायण कमाते हैं लाखों रुपये

हमारे देश के किसान भी जमाने के साथ में हाईटेक होते जा रहे हैं. धान,गेहूं से जब अच्छा मुनाफ़ा कमाने में उन्हें दिक्कतें आइन तो उन्होंने भी नया रास्ता इख्तियार कर लिया. इसी वजह से इन दिनों राजस्थान में मोती की खेती काफी प्रचालन में है. इसके लिए किसान सिर्फ नई तकनीक अपना रहे हैं बल्कि मोटा पैसा भी कमा रहे हैं. राजस्थान के सत्यनारायण यादव भी इसी मोती की खेती कर रहे हैं और पैसे कमा रहे हैं.

…जब आईआईटी मुंबई से पढ़ाई करने के बाद खेती करने लगे तथागत

मोती की खेती


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दैनिक भास्कर की एक रिपोर्ट के अनुसार राजस्थान की ढाणी बामणा वाली के सत्यनारायण यादव और उनकी पत्नी सजना सीप की खेती करके मोती उगाते हैं और हर महीने 20 से 25 हज़ार रुपये कमाते हैं. इस अतारह साल भर में उन्होंने लगभग तीन लाख रुपये कमाए हैं. सीप से मोती उगाने की खेती उन्होंने केवल 10 हज़ार रुपये से शुरू की थी. इसके लिए उन्होंने उड़ीसा में 15 दिन की ट्रेनिंग भी ली. इसके बाद जब ढाणी वापस आये तो अपना काम स्टार्ट कर दिया.

सत्यनारायण बताते हैं कि मोती पालन के लिए पानी का एक हौज बनाया जाता है. इस हौज में वे गुजरात, केरल और हरिद्वार से सीप लाकर डालते हैं. मोती के बिजनेस के लिए घोंघा को पानी के टैंक में अगले 18 महीनों तक उपयुक्त वातावरण में रखा जाता है. ये घोंघा तब तक पानी में रहता है जब तक कि मोती आकार ग्रहण न कर ले. उपयुक्त परिस्थितियों में मोती के आकार ग्रहण करने में तुलनात्मक रूप से कम वक़्त लगता है.

मोती की खेती

प्राकृतिक मोती प्रकृति प्रदत्त होते हैं जबकि इन मोतियों को मानव उगाता है. मानव निर्मित मोती सीप या सीपियों के आंतरिक अंगों में मेंटल ग्राफ्ट और उचित नाभिक की शल्य कार्यान्वयन से बनते हैं. राजस्थान में मोती का व्यवसाय शुरू करने के लिए सरकारी स्तर पर भी कई प्रयास किये गए हैं. प्रदेश के कृषि विभाग ने मोती उगाने की संभावना के मद्देनज़र वैज्ञानिकों की एक टीम उड़ीसा भेजी थी, जहाँ इसकाअध्ययन किया गया. इसके बाद प्रायोगिक स्तर पर मोतियों को विकसित करने का काम शुरू हुआ. नतीजे अच्छे आने की वजह से किसानों को भी प्रेरित किया गया.

राजस्थान के कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी बताते हैं कि खारे और मीठे पानी के तालाब, बाँध और नदियों में भी मोती की खेती हो सकती है. अक्टूबर से दिसम्बर तक मोती की खेती के लिए अनुकूल समय होता है. 10 बाई 10 फीट या फिर 0.4 हेक्टेयर के तालाब में तकरीबन 25 हज़ार सीप से मोती का उत्पादन किया जा सकता है. विशेषज्ञ बताते हैं कि इससे सालाना 8 से 10 लाख रुपये की आमदनी की जा सकती है.

मोती की खेती

सीप एक जलीय जंतु है, जिसका आकार दो कपाटों के रूप में बंद होता है. दोनों कपाट एक दूसरे से जुड़े होते हैं. इसके अन्दर एक जंतु घोंघा रहता है, इसे मॉलस्क भी कहते हैं. ये जंतु अपने शरीर से निकलने वाले चिकने तरल पदार्थ से अपने घर का निर्माण करता है. घोंघा का ये घर कुछ और नहीं बल्कि सीप होती है. इसी सीप से मोती प्राप्त किया जा सकता है.

सीप से निकलने वाले मोती का इस्तेमाल गमले, गुलदस्ते, मुख्यद्वार पर लटकाए जाने वाले सजावटी झूमर, स्टैंडर्ड, डिजाइनिंग दीपक आदि तैयार होए हैं. इतना ही नहीं इसके कवर से पाउडर भी तैयार किया जाता है, जिसका इस्तेअमाल आयुर्वेदिक दवाओं में होता है. इसके अलावा व्यापक स्तर पर मोतियों का इस्तेमाल आभूषणों के तौर पर भी किया जाता है.

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Author: Ashutosh Mishra

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