सांप्रदायिक हिंसा से हिल गया कासगंज, अब तक 112 लोग गिरफ्तार, फिर भी कम नहीं हुआ तनाव

उत्तर प्रदेश के कासगंज में हिंसा के बाद से इलाके में तनाव का माहौल बना हुआ है. पुलिस ने इस मामले में अब तक 112 लोगों को गिरफ्तार किया है. हिंसा भड़कने के तीसरे दिन रविवार को अराजक तत्वों ने एक दुकान में आग लगा दी. हालांकि, स्थिति पर जल्द ही काबू पा लिया गया. पुलिस का दावा है कि स्थिति धीरे-धीरे सामान्य हो रही है लिहाजा अब कर्फ्यू हटा लिया गया है. इलाके पर ड्रोन कैमरों की मदद से नजर रखी जा रही है.

कासगंज हिंसा पर सीएम योगी ने की डीजीपी-मुख्य सचिव के साथ बैठक, आरोपियों पर लग सकता है रासुका


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पुलिस द्वारा रविवार रात जारी बयान के मुताबिक कासगंज हिंसा मामले में अब तक कुल 112 लोग गिरफ्तार किए गए हैं. इनमें से 31 अभियुक्त हैं, जबकि 81 अन्य को एहतियातन गिरफ्तार किया गया है. हिंसा के मामले में अब तक 5 मुकदमे दर्ज किए गए हैं. इनमें से 3 कासगंज के कोतवाल की तहरीर पर पंजीकृत हुए हैं.

पुलिस महानिरीक्षक अलीगढ़ जोन संजीव कुमार गुप्ता ने बताया कि शहर के नदरई गेट इलाके के बाकनेर पुल के पास एक गुमटी में आग लगा दी गई. हालांकि, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए हालात पर जल्द ही काबू पा लिया. कासगंज पुलिस ने चंदन की हत्या के आरोपी के घर पर छापेमारी भी की. आरोपी तो नहीं मिला लेकिन पुलिस का दावा है कि फायरिंग में इस्तेमाल पिस्टल को बरामद कर लिया गया है.

हालात सामान्य करने के लिए सूबे के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ खुद मोर्चा संभाले हुए हैं. उन्होंने रविवार को कासगंज के मुद्दे को लेकर DGP और मुख्य सचिव के साथ बैठक की. बैठक के बाद योगी सरकार की ओर से मृतक चंदन गुप्ता के परिजनों को 20 लाख रुपये मुआवजा देने का ऐलान किया गया.

पुलिस महानिदेशक ओ.पी. सिंह ने कहा कि हिंसा में शामिल लोगों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (NSA) लगाया जाएगा. घर-घर में तलाशी ली जा रही है. कुछ जगहों पर विस्फोटक बरामद हो रहे हैं. इस बीच, हालात के मद्देनजर कासगंज में शांति समिति की बैठक आयोजित की गई.

डीजीपी ओपी सिंह ने कहा कि कासगंज में हालात काबू में है. कानून व्यवस्था हमारी प्राथमिकता है, ड्रोन से नजर रखी जा रही है. घटना को लेकर डीजीपी मुख्यालय ने सरकार को रिपोर्ट सौंप दी है. इस रिपोर्ट में एसपी सुनील सिंह के खिलाफ कार्रवाई की सिफारिश की गई है. इन पर आरोप है कि वे घटना की सूचना मिलने के बाद घंटों देर से मौके पर पहुंचे, जिससे स्थित काबू से बाहर हो गई.

आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक अजय आनन्द ने बैठक के बाद बातचीत में दावा किया कि शहर में डर का माहौल नहीं है. पुलिस ने वारदात पर रोक लगाई है और घटनाओं में शामिल किसी भी व्यक्ति को नहीं बख्शा जाएगा. ऐसे लोगों को गिरफ्तार किया जा रहा है. जब तक ऐसा आखिरी व्यक्ति नहीं पकड़ लिया जाता, तब तक हमारा अभियान जारी रहेगा. उन्होंने कहा कि शांति समिति की बैठक में शहर के गणमान्य लोग शामिल थे और बैठक में तय किया गया कि सभी दुकानदार अपनी-अपनी दुकानें खोलेंगे.

बैठक में हिस्सा लेने वाले आगरा के मण्डलायुक्त सुभाष चन्द्र शर्मा ने कहा कि बैठक के दौरान सभी पक्षों ने अपना-अपना नजरिया पेश किया और मौजूदा हालात को लेकर अपनी चिंता जाहिर की. प्रशासन ने उनकी हर सम्भव मदद का आश्वासन दिया है. बैठक में शामिल लोगों से अपने-अपने इलाकों में निगरानी रखने को कहा गया है.

शर्मा ने कहा कि दुकानदारों से कहा गया है कि वे अपने-अपने प्रतिष्ठान खोलें. प्रशासन सुरक्षा सुनिश्चित करेगा. दुकानें खुलेंगी तो हालात धीरे-धीरे सामान्य हो जाएंगे. जिला प्रशासन वीडियो फुटेज के आधार पर उपद्रवियों को चिह्नित कर रहा है और उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होगी.

उत्तर प्रदेश के कासगंज में बवाल की आंच अब धीमी पड़ रही है लेकिन सियासत सुलगने लगी है. डिप्टी सीएम ने तो यहां तक कह दिया है कि इसके पीछे बड़ी साजिश है. इस बीच, प्रदेश के उपमुख्यमंत्री दिनेश शर्मा ने कासगंज में हुई घटना को दुखद बताते हुए इसकी निन्दा की. उन्होंने कहा कि जो लोग भी इसके लिये दोषी हैं, उनमें से एक भी व्यक्ति नहीं बख्शा जाएगा.

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने खुद हालात की समीक्षा की है. अपराधी चाहे जितना बड़ा या प्रभावशाली हो, उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी. अब हमारे पास कड़े कानून आ गए हैं. यह गड़बड़ी करने वालों के लिए चेतावनी भी है. कुछ लोग लूटपाट कराने और आपसी मतभेद कराने कोशिश कर रहे हैं. दंगे करने वालों के साथ-साथ फसाद की साजिश करने वाले भी दण्डित होंगे.

इस बीच, बसपा अध्यक्ष मायावती ने कासगंज में हुए उपद्रव का जिक्र करते हुए कहा कि सूबे में जंगलराज है. इसका ताजा उदाहरण कासगंज की घटना है जहां हिंसा की आग अब भी शांत नहीं हुई है. बसपा इसकी कड़ी निन्दा के साथ-साथ दोषियों को सख्त सजा देने की मांग करती है.

उन्होंने कहा कि खासकर भाजपा शासित राज्यों उत्तर प्रदेश, गुजरात, मध्य प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान तथा महाराष्ट्र आदि में अपराध-नियंत्रण और कानून-व्यवस्था के साथ-साथ जनहित तथा विकास का बुरा हाल है. इससे यह साबित होता है कि भाजपा एण्ड कम्पनी का हर स्तर पर घोर अपराधीकरण हो गया है.

पूर्व सीएम और सपा नेता अखिलेश यादव ने मृतक चंदन के परिवार के लिए 50 लाख रुपये के मुआवजे की मांग की है. उन्होंने कहा, ‘अगर हम कासगंज चले गए तो बीजेपी वाले हमारे ऊपर आरोप लगाने लगेंगे. माहौल सही हो जाने के बाद मृतक के घर जाऊंगा.’ सपा उपाध्यक्ष किरणमय नंदा ने कासगंज की घटना की निष्पक्ष जांच की मांग की. उन्होंने कहा कि हमेशा चुनाव के पहले दंगा होता है. मुजफ्फरनगर में भी लोकसभा चुनाव से पहले दंगा हुआ था. कासगंज में भी दंगा हुआ. चुनाव से पहले ही क्यों दंगा होता है. इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए.

शुक्रवार को गणतंत्र दिवस पर VHP और ABVP के कार्यकर्ताओं ने तिरंगा यात्रा निकाली थी. तिरंगा यात्रा जब बिलमार गेट के पास अल्पसंख्यक समुदाय के मुहल्ले से गुजरने लगा तो तिरंगा यात्रा निकाल रहे युवकों ने भड़काऊ नारेबाजी की, जिससे दो गुटों में झड़प शुरू हो गई. झड़प इतनी बढ़ी की इसने हिंसा का रूप ले लिया.

दोनों पक्षों के बीच जमकर पत्थरबाजी हुई और गोलियां भी चलीं. फायरिंग में हिंदू समुदाय के एक युवक चंदन गुप्ता की मौत हो गई. युवक की मौत के बाद हिंसा ने उग्र रूप ले लिया. उपद्रवियों ने जमकर दुकानों में तोड़फोड़, लूटपाट और आगजनी की. रात होते-होते इलाके में भारी पुलिस और सुरक्षा बल तैनात करना पड़ा और कर्फ्यू लगा दिया गया.

कासगंज में हिंसा

रात भर माहौल शांत लेकिन तनावपूर्ण बना रहा. वारदात के दूसरे दिन भी शहर में हिंसा जारी रही. उपद्रवियों ने तीन दुकानों, दो निजी बसों और एक कार को आग के हवाले कर दिया था. प्रशासन ने रविवार रात दस बजे तक इंटरनेट सेवाओं को बंद कर दिया था ताकि सोशल मीडिया के जरिए फैलने वाली अफवाहों को रोका जा सके. रैपिड एक्शन फोर्स और पीएसी के जवान लगातार चौकसी कर रहे हैं. जिले की सीमाएं सील कर दी गयी हैं ताकि शांति भंग करने का प्रयास करने वालों को शहर में प्रवेश से रोका जा सके.

आगरा जोन के अपर पुलिस महानिदेशक, अलीगढ के मंडलायुक्त, अलीगढ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक लगातार मौके पर हैं.

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Author: Ashutosh Mishra

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