संसार का सबसे अभागा जानवर कौन है?

“संसार का सबसे अभागा जानवर कौन है?”

“वह जो मनुष्य के लिए सर्वाधिक उपयोगी है।”

“लेकिन मनुष्य के लिए तो पूरी प्रकृति ही उपयोगी है।”


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“हाँ , लेकिन वह जो मनुष्य को मात्र अपने लिए उपयोगी लगता है।”

“ऐसे तो बहुत सारे जीव हैं। उन सब में सबसे ऊपर नाम किसका है फिर भी ?”

“पैंगोलिन का नाम सुना है। कहीं देखा है इसे : किसी चित्र में या किसी पिटारी में ?”

अपनी माँ के लाड़ में एक शिशु पैंगोलिन। चित्र इंटरनेट से साभार।

“याद नहीं। हाँ , पर देखा-देखा लगता है।”

“हमारी यादें पालतू पशुओं को लेकर बनती हैं या फिर जंगल की ख़ूबसूरत सदस्यों को। हाशिये के मौन जीवों पर हमारी नज़र बड़ी देर तक नहीं पड़ती।”

“पैंगोलिन हाशिये पर कैसे है ?”

“क्योंकि यह सर्वाधिक जैव-तस्करी झेलने वाला जीव है दुनिया का। अफ़्रीका-एशिया के तमाम देशों से यह विलुप्ति के कगार पर सिर्फ़ इसीलिए पहुँच गया क्योंकि कुछ मनुष्यों की जीभ को इनका मांस अच्छा लगता है और कुछ को इनका उपचार।”

“पैंगोलिन से कैसा उपचार ?”

“चीनी दवाओं में इस जानवर के अंग इस्तेमाल होते हैं।”

“यह उपयोग लाभप्रद है या भ्रामक ?”

“मनुष्य से बड़ा भ्रमजीवी कोई है ? वह जो सोचता है कि इस चींटीखोर जानवर से वह अपनी जीभ और सेहत की तुष्टि कर लेगा सदा के लिए।”

“और जब यह जीव रहेगा ही नहीं संसार में तब ?”

“तब मनुष्य किसी और जीव के बारे में नया भ्रम बना लेगा।”

“और जब संसार में केवल मनुष्य-ही-मनुष्य होंगे तब ?”

“उससे पहले ही भ्रम का यह बुलबुला फूट जाएगा। जब मनुष्य चींटियों की तादाद में होंगे तो कुदरत चींटीखोर हो जाएगी।”

डॉक्टर स्कन्द शुक्ला की फेसबुक वॉल से साभार

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Author: Indian Letter

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