युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती है इस खिलाड़ी की कहानी

नई दिल्ली: किसी ने सच ही कहा है कि ‘मंजिलें उन्हीं को मिलती हैं, जिनके सपनों में जान होती है। पंख से कुछ नहीं होता, हौंसलों से उड़ान होती है।’ यह कहावत 31 साल की उम्र में भारत-ए टीम में कमबैक करने वाली क्रिकेटर नेहा तंवर पर सटीक बैठती है। उन्हें 2014 में प्रिमेच्योर सिजेरियन डिलिवरी के बाद लंबा बेड रेस्ट करना पड़ा। इस दौरान वजन 20 किग्रा बढ़ गया। कमजोरी इतनी की बड़ी मुश्किल से उठकर दो-चार कदम चल पाती थीं, लेकिन अब उनका सिलेक्शन बांग्लादेश-ए के खिलाफ होने वाले वनडे सीरीज के लिए भारत-ए टीम में किया गया है। यह सीरीज हुबली में 2 दिसंबर से शुरू हो रही है।

8 जनवरी, 2011 को वेस्ट इंडीज के खिलाफ वनडे डेब्यू करने वाली दिल्ली की इस खिलाड़ी की कहानी युवाओं के लिए प्रेरणा बन सकती हैं। तंवर ने उस वक्त क्रिककेट छोड़कर मां बनने का फैसला किया, जब उनका करियर शिखर पर था। वह इंटरनैशनल टीम में थीं। उन्होंने बेटे श्लोक को 2014 में जन्म दिया। प्रिमेच्योर सिजेरियन डिलिवरी होने की वजह से काफी कमजोर हो गईं थीं।

नेहा तंवर


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इसके 2 साल बाद उन्हें लगा कि वह क्रिकेट के बगैर नहीं रह पाएंगी और फिटनेस पर ध्यान देना शुरू कर दिया। वह बताती हैं कि मां बनना हर महिला के लिए गौरव की बात होती है। इस दौरान शरीर में काफी बदलाव भी होए। लाइफ स्टाइल और प्रायोरिटीज भी बदलते। लेकिन, एक वक्त ऐसा भी आया, जब मैं फिर से क्रिकेट के बारे में सोचने लगी।

उन्होंने बताया कि क्रिकेट में वापसी का श्रेय फैमिली को जाता है। खासकर पति ऋतुराज और उनकी बहन को। उन दोनों ने मेरी प्रैक्टिस की खातिर बेटे की पूरी जिम्मेदारी खुद ले ली थी। उन्हीं की वजह से मैं क्रिकेट में दूसरी पारी शुरू कर सकी। भारत के लिए अब तक 2 टी-20 खेलने वाली तंवर बताती हैं कि प्रेग्नेंसी के दौरान डॉक्टर ने कहा था कि बच्चा होने के 6 महीने बाद मैं ट्रेनिंग शुरू कर सकती हूं। लेकिन, यह मेरे लिए आसान नहीं रहा। 20 किग्रा बढ़े वजन को कम करने के बाद 2016 में दिल्ली की टीम में वापसी कर सकी।

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Author: Vineet Verma

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