बलूचिस्तान की आजादी की मांग करने वाले महत्वपूर्ण नेताओं में से एक का कहना है कि इस काम में मदद के लिए वह भारत जैसे मित्र राष्ट्रों से संपर्क करेंगे। औपचारिक रूप से ‘हिज हाईनेस द खान ऑफ कलत’ के रूप में जाने जाने वाले अमीर अहमद सुलेमान दाऊद ने पिछले वर्ष लाल किले की प्राचीर से स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के भाषण में बलूचिस्तान का मसला आने का स्वागत किया।
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लंदन में गुरुवार (23 फरवरी) को मीडिया से बातचीत के दौरान दाऊद ने कहा, ‘भारत क्षेत्रीय शक्तियों में से एक है, दुनिया का सबसे बड़ा लोकतंत्र है। प्रधानमंत्री (मोदी) की बात लंबे समय में पड़ोसियों से आने वाली पहली सकारात्मक आवाज है और हम इस हस्तक्षेप का स्वागत करते हैं। हमें पता है कि हमारे पास दोस्त है।’
मोदी के भाषण में बलूचिस्तान की जनता का जिक्र आने की पाकिस्तान ने आलोचना की थी। मोदी के संबोधन में इस जिक्र को बलूचिस्तान की आजादी की लड़ाई में अप्रत्यक्ष समर्थन के तौर पर देखा जा रहा है। क्षेत्रीय नीति में महत्वपूर्ण बदलाव के संकेत देते हुए, मोदी ने कहा था, ‘पिछले कुछ दिनों में बलूचिस्तान , गिलगित, पाकिस्तानी कब्जे वाले कश्मीर के लोगों ने मुझे धन्यवाद दिया है, कृतज्ञता जतायी है और मुझे शुभकामनाएं दी हैं।’ दाउद पिछले कुछ वर्षों से ब्रिटेन के वेल्स में निर्वासित जीवन व्यतीत कर रहे हैं।
बलूचिस्तान में लोगों पर हो रहे अत्याचारों को 1971 के मुक्ति संग्राम के दौरान पाकिस्तान सेना द्वारा किए गए बंगालियों के नरसंहार के बराबर बताते हुए स्व-निर्वासित बलूच नेता ने मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठाने तथा अशांत क्षेत्र को ‘पाकिस्तानी कब्जे’ से मुक्त कराने के लिए बांग्लादेश से मदद मांगी है। बांग्लादेश के मुक्ति संग्राम का हवाला देते हुए, मीर सुलेमान दाऊद जान अहमदजई ने बुधवार (14 दिसंबर, 2016) को यहां कहा, ‘वे (पाकिस्तान) वैसा ही अत्याचार कर रहे हैं, जैसा उन्होंने आपके साथ किया था।’ मुक्ति संग्राम के दौरान करीब तीस लाख बंगालियों की निर्मम हत्या की गयी थी।
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स्वतंत्रता आंदोलन का नेतृत्व करने वाले बांग्लादेश के राष्ट्रपिता शेख मुजीबुर रहमान का हवाला देते हुए उन्होंने कहा, ‘वर्तमान प्रधानमंत्री (शेख हसीना) का परिवार इसी संकट से और इससे बुरे संकट से गुजरा है।’ उन्होंने कहा कि पाकिस्तान ने उनके देश पर मार्च 1948 में कब्जा किया और तभी से जनांदोलन को दबाने के लिए अत्याचार किए जा रहे हैं। अहमदजई ने कहा कि बलूच आशा कर रहे हैं कि बांग्लादेश ‘उनके हालात के राजनयिक पहलू को समझेगा और सहयोग’ करेगा, ताकि ढाका इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र में उठा सके।
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