पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर तक, दाम घटाने का बस ये ही तरीका

नई दिल्ली। भारत में पेट्रोल-डीजल की आसमानी छूती कीमतों ने सरकार के माथे पर चिंता की लकीरें डाल रखी हैं। पेट्रोल 80 रुपये प्रति लीटर की कीमत को पार कर गया है। ईंधन की बढ़ती कीमतों से निपटने के लिए ऑइल मिनिस्ट्री चाहती है कि पेट्रोल और डीजल पर से उत्पाद शुल्क घटाए जाए। ऑइल मिनिस्ट्री के 2 अधिकारियों ने आगामी बजट में इस तरह की कोशिश की तैयारी की जानकारी दी है।

पेट्रोल पंप

रॉयटर्स के मुताबिक इस साल कुछ बड़े राज्यों के विधानसभा चुनाव हैं। इसके अलावा 2019 के आम चुनावों की भी तैयारी शुरू होने वाली है। ऐसे में रेकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुकी तेल की कीमतों ने मोदी सरकार पर दबाव बढ़ा दिया है। दक्षिण एशिया के देशों की तुलना में देखें तो भारत में पेट्रोल और डीजल काफी महंगा है। ईंधन की इस बेहिसाब बढ़ती कीमतों के लिए 40-50 फीसदी तक टैक्स जिम्मेदार हैं।


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ऑइल मिनिस्ट्री के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि हम केवल उत्पाद शुल्क में कटौती का सुझाव दे सकते हैं। अब वित्त मंत्रालय पर है कि वह इसपर क्या फैसला लेता है। हालांकि आगामी बजट में उत्पाद शुल्क घटाना इतना आसान भी नहीं है। सरकार पहले से ही राजकोषीय घाटे से जूझ रही है। जुलाई के बाद जीएसटी प्रभावी होने की वजह से टैक्स रेवेन्यू भी गिरा है।

वित्तीय वर्ष 2016-17 में पेट्रोलियम सेक्टर ने सरकार के लिए 81 अरब डॉलर (52 खरब रुपये) का राजस्व जुटाया था। केद्र और राज्यों के कुल राजस्व का एक तिहाई हिस्सा पेट्रोलियम सेक्टर से ही आता है। वैश्विक तेल बाजार में गिरावट के बीच भारत ने नवंबर 2014 से जनवरी 2016 के दौरान 9 बार उत्पाद शुल्क को बढ़ाया था। सरकार के वित्तपोषण को ध्यान में रखते हुए ये कदम उठाया गया था। पिछले अक्टूबर में सरकार ने उत्पाद शुल्क में 2 रुपये प्रति लीटर के हिसाब से कटौती की।

सूत्रों का कहना है कि पेट्रोलियम मंत्रालय ने सरकार से पेट्रोल, डीजल और प्राकृतिक गैसों को भी जीएसटी के अधीन करने की मांग की है। फिलहाल इन्हें जीएसटी से बाहर रखा गया है जिससे ईंधन को रिफाइन करने के लिए खरीदे गए उपकरणों पर इनपुट टैक्स क्रेडिट का क्लेम नहीं किया जा सकता। हिंदुस्तान पेट्रोलियम कॉर्पोरेशन के फाइनैंस हेड जे रामास्वामी का कहना है कि हम करीब 70 फीसदी वॉल्यूम पर इनपुट टैक्स क्रेडिट क्लेम नहीं कर सकते।

उनके मुताबिक इसकी वजह से उन्हें हर तिमाही में करीब 1.5 अरब रुपये का नुकसान हो रहा है। पेट्रोलियम मंत्रालय का कहना है कि इन्हें जीएसटी के अधीन लाने से ईंधन की खुदरा कीमतों में कमी लाने में मदद मिलेगी। जीएसटी के तहत सर्वोच्च टैक्स स्लैव 28 फीसदी का ही है।

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Author: Vatsaly

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