पीएम मोदी ने दावोस में भाषण से दुनिया के साथ दिया भारत को भी संदेश

वर्ल्ड इकनॉमिक फोरम यानी डब्ल्यूईएफ के उद्घाटन भाषण में पीएम मोदी ने ‘खुलेपन की जरूरत’ पर जोर देकर न केवल आर्थिक जगत की वैश्विक ताकतों को बल्कि भारत में अपने समर्थकों और विरोधियों को भी स्पष्ट संदेश दिया। पीएम के साथ काम करनेवाले कुछ लोगों ने यह बताया। उन्होंने कहा कि इस संदेश के आर्थिक और सांस्कृतिक पहलू हैं।

डब्ल्यूईएफ के उद्घाटन भाषण में पीएम मोदी

राजनीतिक विरोधियों को संदेश

पीएम के भाषण की बीजेपी अध्यक्ष अमित शाह ने प्रशंसा की और कहा कि उन्होंने (मोदी ने) वैचारिक भिन्नता वाले विश्व में भारत की शक्तियों और आकांक्षाओं का बेहतरीन विश्लेषण किया। मोदी के आर्थिक सुधारों का विरोध न केवल कांग्रेस ने बल्कि वैचारिक स्तर पर बीजेपी के सहयोगी संगठन आरएसएस ने भी किया है। आरएसएस से संबद्ध संस्था स्वदेशी जागरण मंच ने सिंगल ब्रैंड रिटेल में ऑटोमैटिक रूट से 100% एफडीआई की अनुमति का विरोध किया जबकि प्रधानमंत्री ने दावोस के भाषण में निवेशकों के सामने इसे बड़े सुधार के तौर पर पेश किया। स्वदेशी जागरण मंच का कहना है कि सिंगल ब्रैंड रिटेल में 100% एफडीआई से घरेलू विनिर्माण को धक्का लगेगा और यह मेक इन इंडिया जैसे अभियानों के खिलाफ जाएगा।


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आंकड़ों के साथ उपलब्धि

एक अधिकारी ने कहा कि पीएम इस बात पर दृढ़ थे कि वह बिना आंकड़ों के अपनी सरकार की किसी उपलब्धि का जिक्र नहीं करेंगे। उन्होंने अपने भाषण में जीएसटी, लाइसेंस राज एवं गैरजरूरी कानूनों के खात्मे, नौकरशाही की जगह लाल कालीन, ऑटोमैटिक रूट से एफडीआई आदि को अपनी सरकार की उपलब्धियों के तौर पर गिनाया। एक अधिकारी ने कहा, ‘प्रधानमंत्री अपने देशवासियों और समर्थकों को यह भरोसा दिलाने की भरपूर कोशिश कर रहे हैं कि उनका एक-एक कदम राष्ट्रहित में है।’

‘खुलेपन की जरूरत’ का दिया संदेश

मोदी ने विदेशी बाजारों और विविध संस्कृतियों के प्रति खुलेपन की जरूरत पर जोर दिया और कहा कि कारोबारियों के लिए भारत का द्वार हमेशा खुला है, लेकिन उन्होंने चेतावनी भी दी कि संरक्षणवाद जड़ें जमा रहा है और वैश्वीकरण की भावना को ठेस पहुंच रही है। इस समझाने के लिए मोदी ने महात्मा गांधी के उस वक्तव्य का उदाहरण दिया जिसमें गांधी ने अपने कमरों की खिड़कियां खोलकर रखने की बात कही थी।

चिनफिंग ने दावा किया, मोदी ने किया वादा

एक अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने (मोदी ने) स्पष्ट कर दिया कि एक्सचेंजों में खुलापन अपनाने के सिवा कोई चारा नहीं है।’ पिछले साल चीन के राष्ट्रपति शी चिनफिंग ने कहा था कि चीन मुक्त व्यापार और खुले बाजारों के चैंपियन होने की अमेरिका की पारंपरिक भूमिका अपनाने जा रहा है। एक अधिकारी ने कहा, ‘हमारे प्रधानमंत्री ने वैश्वीकरण की भरपूर वकालत की, लेकिन बड़े-बड़े दावे नहीं किए। उन्होंने सिर्फ वादे किए और बताया कि कैसे आयात और प्रत्यक्ष विदेशी निवेश के लिए भारत का परिदृश्य बदल रहा है और कैसे यह वैश्विक व्यवस्था के लिए अच्छा है।’

श्लोक, संस्कृति और दर्शन का सहारा

मोदी ने भाषण में संस्कृत के कई श्लोकों का इस्तेमाल किया और ऋग वेद, उपनिषद, महात्मा गांधी तथा रवींद्रनाथ टैगोर की उक्तियों को हवाला दिया। मोदी के दावोस दौरे की तैयारी करनेवालों ने बताया कि समारोह में सारे तीर निशाने पर लगे, इसके लिए बहुत मेहनत की गई। एक अधिकारी ने कहा, ‘उन्होंने (मोदी ने) भारत को न केवल सांस्कृतिक साझेदारी और आर्थिक सुधारों के प्रति उदार दिखाने की कोशिश की बल्कि विकसित देशों को जलवायु परिवर्तन के प्रति गंभीर और समेकित कदम उठाने का भी कड़ा संदेश दिया।’

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Author: Ashutosh Mishra

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