पहले कॅरियर बनाओ फिर करो मनचाही शादी

दिनेश पाठक


लखनऊ में एक प्रेमी युगल ने खुदकुशी कर ली। दोनों ने इसकी जगह अपने-अपने घर से दूर चुनी। ये एक काम्प्लेक्स की छत पर पहुँचे। हाथ की नस काटी। फिर वहीं से कूदकर जान दे दी। जिस किसी ने इस घटना को सुना, अवाक रह गया। लड़के की माँ ने तो यहाँ तक कहा कि अगर मेरा बेटा इस संदर्भ में मुझसे बात करता, तो मैं शादी कर देती। लड़की की डायरी से खुलासा हुआ कि घर वाले तैयार नहीं थे, इसलिए खुदकुशी करना इन दोनों ने उचित समझा। इस तरह दो होनहार इस दुनिया से अलविदा कह गए। घर वालों को रोने के लिए छोड़ दिया। खुदकुशी करने वाले किसी भी इंसान को कमजोर, बुजदिल ही कहा जाएगा। क्योंकि इस दुनिया में ऐसी कोई भी समस्या नहीं है, जिसका निदान न हो।

शादी

यह सिर्फ एक घटना नहीं है। इसमें कई संदेश छिपे हैं। दोनों ही अभी पढ़ाई कर रहे थे। बावजूद इसके प्यार और शादी की इतनी जल्दी थी, कि न हो पाने की आशंका मात्र से खुदकुशी का रास्ता चुन लिया। मुझे नौजवानों से कहना है कि आप एक बार अपने घर में नजर दौड़ाकर देखो। परिवार में जिस सदस्य की आर्थिक स्थिति अच्छी होती है, घर के लोग उसका ज्यादा ध्यान रखते हैं। अगर आप चाहते हो कि शादी पसंद की ही लड़की से करनी है, तो उसकी पहली शर्त होनी चाहिए कि आप अपने घर में ऐसी जगह बना लो कि कोई आप की बात काटे ही नहीं। और अगर विरोध इसके बाद भी हो तो कम से कम आप इस स्थिति में रहो कि आसानी से उसका सामना कर लो। आप कल्पना कर लो। बेहतरीन छात्र के रूप में जीवन को आगे बढ़ाते हुए अगर आपका चयन आईएएस में हो जाता है, तो कोई है जो आपकी शादी मनचाही जगह या लड़के/ लड़की से होने से रोक लेगा। नहीं। क्योंकि तब तक आप इतनी मजबूत स्थिति में होते हो कि घर वाले भी आपके साथ खड़े हो जाते हैं। वह इसलिए नहीं खड़े होते कि आप आईएएस बन जाते हो। ऐसा इसलिए माना जाता है कि अब आप सक्षम हो। समझदार हो। ऊंच-नीच की समझ आपके पास है।


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अभिभावक मुझे माफ़ करेंगे, मैं प्रेम विवाह को गलत या सही नहीं ठहरा रहा हूँ। मैं केवल खुदकुशी की स्थिति से बचने की बात करते हुए अपना तर्क दे रहा हूँ। कल्पना करिए खुदकुशी करने वाले दोनों युवक-युवती में से कोई भी किसी पोजीशन पर होता, तो क्या यह स्थिति बनती। शायद नहीं। क्योंकि तब आपके प्रस्ताव पर गम्भीरता से विचार होता है। बहुत कम माता-पिता ऐसे होते हैं, जो पोजीशन वाले अपने बेटे या बेटी की शादी के प्रस्ताव को न मानते हों। अगर ऐसा नहीं होता, तो दो साल की ट्रेनिंग करते हुए सिविल सर्विसेज पास युवक-युवतियाँ बड़ी संख्या में क्यों बाद में शादी कर लेते हैं। न तो लड़के वाले विरोध करते हैं न ही लड़की वाले। भले ही मामला विजातीय हो। क्योंकि दोनों ही परिवारों को यह भरोसा होता है कि ये समझदार हैं। फैसला कुछ सोच समझ कर ही लिया होगा। ऐसे मामलों में एक आधार यह भी होता है कि लड़की वालों को बिना किसी अतिरिक्त मेहनत के बराबरी का दामाद मिल गया। ठीक वैसी ही स्थिति दूसरी ओर होती है। बिना किसी अतिरिक्त प्रयास के एक काबिल बहू घर में आ गई। ऐसे मामलों में दहेज आदि का मामला काफी हद तक तंग नहीं करता।

समझना आसान होगा। अगर आपने पढ़ाई के दौरान ही तय कर लिया कि हमें किस तरह की लड़की या लड़के से शादी करनी है तो उसकी तैयारी कुछ इस तरह से करिए कि घर वालों के पास मना करने का कोई कारण ही न हो। इसीलिए सलाह दी जाती है कि पहले कॅरियर फिर शादी। खुदकुशी तो कमजोर लोग करते हैं, मजबूत लोग खुद से कमिटमेंट करते हैं और उसे पूरा करके दिखाते भी हैं। फिर न घर की झंझट न पुलिस की। सब खड़े होकर शादी करवाएंगे।

(लेखक मोटीवेशनल स्पीकर हैं। पैरेंटिंग पर उनकी तीन किताबें हैं। एक किताब पर उत्तर प्रदेश दूरदर्शन ने धारावाहिक तैयार किया है। आप छात्रों, पैरेंट्स और टीचर्स के साथ संवाद करते रहते हैं)

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Author: Indian Letter

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