पद्मावत पर बवाल ने पलटवाये 478 साल पुराने पन्ने, फिल्म बना रही नया रिकॉर्ड

देशभर में भारी विरोध प्रदर्शन के बीच रिलीज हुई फिल्म ‘पद्मावत’ ने संजय लीला भंसाली की ही बाजीराव मस्तानी से दोगुनी कमाई कर ली. देशभर में रिलीज न हो पाने के बावजूद पद्मावत की कमाई पहले चार दिनों में 100 करोड़ रुपए हो गई है. जबकि, 2015 में आई बाजीराव मस्तानी चार दिन में 57 करोड़ रु. ही कमा पाई थी. जबकि दोनों ही फिल्म में स्टारकास्ट भी एक जैसी है. अगर पीरियड फिल्मों से इसकी बराबरी की जाए तो ‘बाहुबली-2’ की चार दिन की कमाई ‘पद्मावत’ से 78 करोड़ ज्यादा थी.

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पद्मावत की कमाई


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150 करोड़ तक पहुंच रही फिल्म

फिल्म ट्रेड एनालिस्ट अामोद मेहरा कहते हैं कि इतने विरोध के बावजूद पद्मावत रविवार रात तक 150 करोड़ का कारोबार कर सकती है, क्योंकि लॉन्ग वीकेंड का फायदा इसे मिलेगा। फिल्म के लिए बहुत अच्छी एडवांस बुकिंग मिली है.

हालांकि, दूसरी तरफ फिल्म ट्रेड एनालिस्ट गिरीश जौहर को बिजनेस से ज्यादा चिंता लोगों की सिक्युरिटी की है. वे कहते हैं, “फिल्म की कमाई को लेकर एक अनुमान था कि यह पहले ही दिन 20 करोड़ कमाएगी, लेकिन इससे मिले सिर्फ 5 करोड़ रुपए, लेकिन दूसरे दिन इसने 19 करोड़ कमाए, तीसरे दिन 32 करोड़ और चार दिनों में इसकी कमाई देखें तो यह करीब 100 करोड़ तक पहुंच रही है.

हालांकि, मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तरप्रदेश जैसे बड़े हिन्दी बेल्ट वाले प्रदेशों और गुजरात में पूरी तरह स्क्रीनिंग नहीं हो पाने का खामियाजा इसे उठाना पड़ रहा है. फिल्म 3500 स्क्रीन पर ही लग पाई, जबकि शुरुआती अंदाजा 4000 स्क्रीन पर रिलीज का था.”

अामोद के मुताबिक, “अनुमान है कि फिल्म राजस्थान में 4 करोड़, गुजरात में 12 करोड़, उत्तरप्रदेश में 10 करोड़, मध्यप्रदेश में 2 करोड़ रुपए और कमा सकती थी. फिल्म का चार दिनों का कुल कलेक्शन 28 करोड़ और हो सकता था. यानी कुल 128 करोड़ रुपए का करोबार फिल्म कर सकती थी.

बाहुबली-2 के हिन्दी वर्जन ने शुरुआती चार दिनों में 178 करोड़ रुपए का कारोबार किया था. इस तरह बाहुबली से पद्मावत से 50 करोड़ रुपए पीछे रही है. वैसे सभी भाषाओं में बाहुबली-2 ने चार दिन में 383 करोड़ का कारोबार किया था.

ट्रेड एनालिस्ट अमूल मोहन कहते हैं, “इन चार राज्यों में फिल्म के न दिखाए जाने से इसे 30 से 35% का नुकसान हुआ है. फिल्म ने शुक्रवार तक 32 करोड़ रुपए कमाए थे. यानी उसे हर रोज करीब 10 करोड़ का नुकसान हो रहा है. अकेले गुजरात में 12 से 15 फीसदी तक का नुकसान हुआ है. भंसाली की फिल्में वहां काफी पसंद की जाती हैं. हालांकि, बाहुबली ने यह कलेक्शन तब किया था जब फिल्म देश में 6500 स्क्रीन पर ही रिलीज हुई थी.

बकौल अमूल, “नेटफ्लिक्स में इसके डिजिटल राइट्स 25.5 करोड़ में लिए थे. जबकि, पद्मावत के डिजिटल राइट्स एमेजॉन प्राइम ने 25 करोड़ में लिए हैं. विदेशों में 800 स्क्रीन पर लगी है. जिसमें अमेरिका, पाकिस्तान, ब्रिटेन समेत कई देशों में यह बिना किसी कट के रिलीज हुई है.”

फिल्म एनालिस्ट कोमल नाहटा कहते हैं, “एक-दो दिनों में हालात सुधर जाएंगे। विरोध की आवाजों को लोग अनसुना कर देंगे और विरोध वाली जगहों पर भी यह दिखाई जाएगी.”

जौहर कहते हैं, “हमारी चिंता ऑडियंस की सिक्युरिटी और सरकार के चुपचाप सब कुछ देखते रहने को लेकर है. सुप्रीम कोर्ट के आदेश तक का पालन नहीं हो रहा है.” हालांकि, फिल्म विदेश में अच्छा कर सकती है. पाकिस्तान में भी इसकी स्क्रीनिंग को इजाजत मिल गई है. यूएसए और यूके में भी फिल्म को अच्छे स्क्रीन मिले हैं. यहां से फिल्म को अच्छे मुनाफे की उम्मीद है.

मेहरा भी इस बात को मानते हुए कहते हैं, उम्मीद है कि खास तौर से यूरोपीय देशों में फिल्म अच्छा कर सकती है. करीब 21 देशों में फिल्म रिलीज हो रही है, जबकि नाहटा को भरोसा है कि फिल्म विदेशों में कमाई के मामले में पुराने सारे रिकॉर्ड तोड़ देगी.

आंकड़ों के लिहाज से देखें तो भारत में पद्मावत 3500 स्क्रीन पर आई और विदेशों में 800 स्क्रीन पर लगी है. जबकि बाजीराव मस्तानी भारत में 2700 स्क्रीन पर लगी थी, क्योंकि उसी समय शाहरुख की दिलवाले भी रिलीज हुई थी। यानी विदेशों में पद्मावत को उससे कम स्क्रीन मिले हैं. पद्मावत को लेकर विवाद के बाद इसकी पांडुलिपि को देखने टूरिस्ट समेत कई और लोग पटना की बड़ी लाइब्रेरियों में पहुंच रहे हैं.

मनेर शरीफ दरगाह के सैयद तारिक इनायतुल्लाह फिरदौसी कहते हैं, “हमारे पास हर रोज पद्मावत के बारे में जानकारी लेने के लिए लोगों के फोन आ रहे हैं. कई सालों से यहां पांडुलिपि ताले में रखी थी और इसे देखने कोई नहीं आ रहा था, लेकिन अब हर महीने 100 से ज्यादा लोग आ रहे हैं. फारसी और उर्दू में पद्मावत की ट्रांसलेट की हुई पांडुलिपि खुदाबख्श लाइब्रेरी में हैं.

फिल्म को लेकर हो रहे विवाद के बीच इसकी पांडुलिपियों के बारे में लोगों की उत्सुकता बढ़ी है. इन्हें देखने या इनके बारे में जानने के लिए लोग कोशिश भी कर रहे हैं. इसमें से एक अवधी, एक फारसी और एक उर्दू में लिखी है. पटना में मौजूद यह पांडुलिपियां इसलिए भी बेहद अहम हैं, क्योंकि देश में शायद ही कहीं और यह मौजूद है.

बता दें कि पद्मावत मूल रूप से मलिक मोहम्मद जायसी की किताब पद्मावत पर बेस्ड है. इसकी रचना 1540 ई. में जायसी ने अवधी भाषा में की थी. 478 साल पहले लिखी गई किताब की तीन दुर्लभ पांडुलिपियां पटना में मौजूद हैं.

फारसी और उर्दू की पांडुलिपि में उल्लेख है कि पद्मावत की रचना मलिक मोहम्मद जायसी ने 1540 ई. में की थी. तब उन्होंने इसे शेरशाह सूरी के लिए लिखा था और उन्हें डेडिकेट किया था.

अवधी से फारसी में ट्रांसलेट 1619 ई. में मुल्ला अब्दुस शकूर बज्मी ने किया. वह ईरान के शीराज शहर से गुजरात आए थे और भारत में ही रहकर ट्रांसलेशन का काम किया था. तब बज्मी ने इस ट्रांसलेशन को मुगल बादशाह जहांगीर को डेडिकेट किया था.

वहीं खुदाबख्श लाइब्रेरी में मौजूद पद्मावत की फारसी पांडुलिपि के कातिब (पांडुलिपि की नकल उतारने वाले) मेवादास थे. इसे उन्होंने 1669 ई. में लिखा था। यह 198 पेज में हैं, जिसमें 31 तस्वीरें हैं. इनमें रानी पद्मावती की वीरता, त्याग और बलिदान को दिखाया गया है.

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Author: Ashutosh Mishra

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