पंचेश्वर बाँध: बिजली के लिए 134 गाँव का खात्मा कहाँ तक लाजिमी!

उत्तराखंड में इन दिनों पंचेश्वर बाँध को लेकर काफी शोर है. यह बांध पिथौरागढ़, चम्पावत जिले में नेपाल की सीमा पर काली नदी के ऊपर पंचेश्वर में बनेगा. यह बांध बनेगा तो उत्तराखंड के लगभग 134 गाँव समाप्त हो जाएंगे या यूं कहिये कि यहाँ के लोगों को अपना सब कुछ मायने जल, जंगल, जमीन छोड़कर वहां रहने के लिए जाना होगा, जहाँ सरकारें चाहेंगी.

हालांकि, कुछ लोग यह भी कह रहे हैं कि ग्रामीणों को सरकार पैसे देकर वहां से हटा देगी. वे जहाँ मर्जी हो जाएँ, रहें. हिमालय जैसे कच्चे पहाड़ के बीच बनने वाली इस परियोजना से भारत को सिर्फ 2400 मेगावाट बिजली मिलने का प्रस्ताव है. इतनी ही बिजली नेपाल को मिलने वाली है. इन दिनों उत्तराखंड में इस परियोजना को लेकर जन सुनवाई का कार्यक्रम चल रहा है और साथ ही साथ विरोध भी शुरू हो चला है.

विस्थापित होने वाले लोग कहाँ जाएंगे, उनकी आजीविका कैसे चलेगी, इस तरह के गंभीर मुद्दों पर व्यवस्था मौन है और यही आन्दोलन, विरोध का कारण है…


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कुछ जागरूक लोग अदालत की शरण में भी गए हैं. अभी यह देखा जाना बाकी है कि अदालत से क्या आदेश पारित होता है…

बिना चीजों को साफ किये जनसुनवाई किये जाने पर ही लोग सवाल उठा रहे हैं. और उनकी बात में दम भी है. वे बेवजह शोर नहीं कर रहे हैं. जनसुनवाई विरोध या समर्थन के लिए ही होती है और यह तभी संभव है जब पूरा प्रोजेक्ट जनता के सामने हो…और वही तस्वीर अब तक साफ नहीं है…

असल में ऐसे प्रोजेक्ट राज्य को, वहां की आवाम को कुछ दे पाए न दे पाएं पर, नेताओं-अफसरों और निर्माण एजेंसियों को तो शर्तिया देते ही हैं.

ये है पूरा मामला

मसला फरवरी, 2010 का है. राज्य सरकार ने 56 परियोजनाओं को स्वीकृति दी। भ्रष्टाचार का इल्जाम लगाते हुए उत्तराखण्ड उच्च न्यायालय में एक याचिका दाखिल हुई, तो सुनवाई से ठीक एक दिन पहले राज्य सरकार ने सभी परियोजनाओं की स्वीकृति रदद् कर दी ।

इन्हीं तमाम दिक्कतों के बीच 2013 की आपदा के बाद सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर पर्यावरण मंत्रालय ने विशेषज्ञों की एक जाँच समिति गठित की, इसके अध्यक्ष थे प्रख्यात पर्यावरणविद श्री रवि चोपड़ा. कमेटी ने जो रिपोर्ट सौंपी है, उसका लब्बोलुआब यह है कि उत्तराखण्ड में अब तक स्थापित तथा निर्माणाधीन जल विद्युत परियोजनाओं से पर्यावरण को ठीक-ठीक नुकसान हुआ है.

भागीरथी व अलकनंदा घाटियों में बाँधों की श्रंखला बनने से दोनों नदियों का बड़ा हिस्सा सूख रहा है। भागीरथी नदी की 53  से 80प्रतिशत, अलकनंदा की 25 से 65 प्रतिशत, पश्चिमी धौली की 48 से 99प्रतिशत तथा पिंडर की 23 से 40 प्रतिशत लम्बाई सूख जायेगी।

टिहरी बाँध के नीचे गंगाजल की पवित्रता भी घटी है। टिहरी झील के चारों ओर भूस्खलन व भू धँसाव साफ दिखाई देता है। इसका कारण है जल स्तर का हर वर्ष बढ़ना और घटना।

विशेषज्ञों की चेतावनी दरकिनार

  • समिति ने यह चेतावनी दी कि उत्तराखण्ड में 2,250 मीटर से ज्यादा ऊँची घाटियों में जल विद्युत परियोजनायें भविष्य में खतरनाक हो सकती हैं।
  • प्रख्यात पर्यावरणविद रवि चोपड़ा ने अपने एक लेख में कहा है कि जल विद्युत का ज़माना अब समाप्ति पर है। अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, पश्चिमी यूरोप और दक्षिण अफ्रीका में अब नये बाँध बनाये जाने के बजाय,पुराने बाँध तोड़े जा रहे हैं।
  • जल विद्युत की लागत समय के साथ काफी बढ़ गई है। उनका सुझाव है कि अब हमें सौर ऊर्जा की ओर बढ़ना चाहिए. यह एक बेहतर विकल्प हो सकता है.

पंचेश्वर बाँध

पंचेश्वर बांध पर एक नजर

  • उत्तराखंड के पिथौरागढ़,चंपावत जिले में नेपाल के साथ काली नदी पर पंचेश्वर में बनेगा।
  • इसकी लागत, फायदों में नेपाल और भारत की बराबर की हिस्सेदारी होगी।
  • 4800 मेगावाट बिजली बनाने का प्रस्ताव।
  • एक और बांध रुपालीगाड़ में बनेगा। इससे 240 मेगावाट बिजली पैदा होगी।
  • पंचेश्वर बांध 311 मीटर तथा रुपालीगाड़ बांध 95 मीटर ऊंचा होगा।
  • पंचेश्वर बांध की लागत 40 हजार करोड़ रुपए प्रस्तावित है, इसके बढ़ने का अनुमान है।
  • इसके बनने से चंपावत, पिथौरागढ़ और अल्मोड़ा जिलों के 134 गांवों समाप्त हो जाएंगे।
  • 2018 से बांध का काम शुरू होगा और वर्ष 2026 तक पूरा होने की उम्मीद।
  • पानी पूरा भरने में 2 साल लगेंगे और 2028 तक यह काम भी पूरा हो जाएगा।
  • 122 वर्ग किमी होगी बांध की झील, टिहरी के मुकाबले चार गुना बड़ी होगी झील।
  • बांध में 122 पुराने मंदिर डूब जाएंगे।

उत्तराखंड में बिजली परियोजनाएं

  • उत्तराखण्ड में 450 परियोजनाओं द्वारा कुल 27,039.4 मेगावाट जल विद्युत उत्पादन का लक्ष्य।
  • इनमें से 25 मेगावाट या अधिक क्षमता वाली 129 परियोजनाओं से 25,209 मेगावाट उत्पादन।
  • 5 से 25 मेगावाट वाली 123 परियोजनाओं द्वारा 1,588 मेगावाट बनाने का लक्ष्य है।
  • यानी 252 छोटी, मध्यम व बड़ी योजनाओं से 99 प्रतिशत से जरा ज़्यादा जल विद्युत का उत्पादन होगा और 198 सूक्ष्म परियोजनाओं द्वारा कुल एक प्रतिशत से कम का उत्पादन होगा।
  • 450 बाँध और 27,039 मेगावाट क्षमता निर्माण का यह लक्ष्य कितना व्यावहारिक या विश्वसनीय है?

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लेखक व वरिष्ठ पत्रकार दिनेश पाठक 25 साल की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. वे एक बड़े अखबार के संपादक रहे हैं और उत्तराखण्ड से जुड़े मुद्दों पर व्यापक समझ रखते हैं.

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Author: Vatsaly

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