नोबल पुरस्कार विजेता मलाला की नई किताब में होगी शराणार्थियों के अनुभवों पर आधारित कहानी

लॉस एंजेलिस। नोबेल शांति पुरस्कार विजेता पाकिस्तानी कार्यकर्ता मलाला यूसुफजई अपनी नई किताब लेकर आ रही है। मलाला ने इसकी घोषणा खुद की है। मलाला की इस किताब का नाम ‘वी आर डिस्प्लेस्ड’ है। लिटिल ब्राउन बुक्स फॉर यंग रिडर्स ने इस किताब के राइट्स को खरीद लिया है। यह पुस्तक एक शरणार्थी के अनुभव पर आधारित होगी।

मलाला किताब के जरिए उस अनुभव को पाठकों के साथ साझा करना चाहती जिसमें एक शरणार्थी को अपना घर और समुदाय सब छोड़ कर किसी दुसरी दुनिया में जाना पड़ता है जिसके बारे में आप कुछ नहीं जानते। एंटरटेनमेंट वीकली के मुताबिक यूसुफजई इस किताब के शुरुआत में अपने अनुभवों को साझा करेंगी और उसके बाद वह उन लोगों की कहानी के बारे में भी लिखेंगी जो उन्हें अपनी यात्रा के दौरान मिले थे। इन लोगों में वह लड़कियां भी शामिल हैं जिन्हें अपना घर छोड़ अपने परिवार के साथ दूसरी जगहों पर जीवन व्यतीत करना पड़ रहा है।

मलाला ने इस किताब के बारे में बात करते हुए कहा कि हम लाखों शरणार्थियों और सैकड़ों प्रवासी जो एक नाव या एक ट्रक में फंसे हुए हैं के बारे में सुनते हैं, लेकिन यह तब होता है जब एक चौंकाने वाली छवि के साथ खबर समाचार में दिखाई देती है। लोगों को तब पता चलता है कि वास्तव में क्या हो रहा है। मुझे पता है कैसा महसूस होता है जब आपको अपना सबकुछ छोड़ कर जाना पड़ता है। मैं ऐसे बहुत सारे लोगों को जानती हूं जिन्हें इन सब से गूजरना पड़ा है।


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उन्होंने आगे कहा कि मुझे आशा है कि पिछले कुछ सालों में उन लोगों की कहानियों को साझा करके मैं दूसरों को यह समझने में मदद कर सकती हूं कि क्या हो रहा है और संघर्ष से विस्थापित लाखों लोग कैसी जिंदगी जी रहे हैं। मलाला की किताब ‘वी आर डिस्प्लेस्ड’ 4 सितम्बर को प्रकाशित होगी। मलाला अपनी प्रसिद्ध आत्मकथा ‘आइ एम मलाला’ के लिए जानी जाती है। इस किताब में लिखा गया है कि किस तरह एक लड़की शिक्षा और दुनिया को बदलने के लिए खड़ी होती है। इस किताब ने न्यूयॉर्क टाइम्स की सर्वश्रेष्ठ-विक्रेता सूची में जगह बनाई थी।

2014 में बनीं सबसे कम उम्र की नोबेल प्राइज विनर

पाकिस्तान की नोबेल पुरष्कार विजेली मलाला युसुफजई ने फिलहाल ऑक्सफोर्ड में दाखिला लिया है। जहां वे दर्शन, राजनीति और अर्थशास्त्र की पढ़ाई कर रही हैं। मलाला युसूफजई को 2014 में भारत के कैलाश सत्यार्थी के साथ संयुक्त रूप से नोबेल शांति पुरस्कार दिया गया था। उस वक्त मलाला की उम्र महज 17 साल थी और वो नोबेल शांति पुरस्कार पाने वालों की सूची में सबसे कम उम्र की विजेता हैं।

तालिबानियों का हुई थीं शिकार

आपको बता दें कि, लड़कियों की शिक्षा के अधिकार के लिए आगे आईं 20 वर्षीय मलाला पर 2012 में पाकिस्तानी तालिबानी ने हमला किया था। मलाला युसूफजई तब महज 15 साल की थीं जब तालिबान के एक बंदूकधारी ने उनके सिर में गोली मार दी थी। स्वात घाटी में उस वक्त मलाला अपने स्कूल की परीक्षा दे कर गांव वापस जा रही थीं। मलाला ने पाकिस्तान की लड़कियों को पढ़ाई के प्रति जागरूक करने की कोशिश की थी। इस हमले के तुरंत बाद उन्हें इलाज के लिए बर्मिंघम ले जाया गया और तब से वह अपने पूरे परिवार के साथ बर्मिंघम में ही रह रही हैं। यहीं से उनकी पढ़ाई और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देने का अभियान चल रहा है।

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Author: Web_Wing

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