दौलत और शोहरत से भरी है सिनेमेटोग्राफी की दुनिया

शोबिज वर्ल्ड में करियर बनाना कई लोगों का ख्वाब होता है. ये फील्ड बेशुमार दौलत और शोहरत से भरी हुई है. लेकिन, इस मुकाम तक पहुंचने के लिए जरूरी संघर्ष की कहानी वही लोग समझ सकते हैं, जिन्होंने यहां अलग मुकाम हासिल किया है. सिनेमेटोग्राफी कोई एबीसीडी नहीं है, इस फील्ड में टॉप करना तो दूर की बात है, आपको एंट्री भी तभी मिलेगी जब आपको टेक्नोलॉजी और बाकी चीज़ों की अच्छी समझ होगी.

एक फिल्म बनाने में पर्दे के पीछे और आगे बहुत सारे लोग काम करते हैं. इन्हीं में से है सिनेमेटोग्राफर. ये अपनी तकनीकी कला से फिल्मों में जान डालते हैं. अगर आप भी क्रिएटिव हैं और तकनीक के प्रति रूझान रखते हैं, तो ये एक बेहतर कॅरियर विकल्प है.


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एक अच्छा सिनेमेटोग्राफर कहानी के हिसाब से सीन और डायरेक्टर के अनुसार कैमरा व लाइटिंग एडजेस्ट करने का काम करता है. उसे विजुलाइजेशन और लाइटिंग की सटीक जानकारी होती है.

जरूरी है कैमरे का ज्ञान 

सिनेमेटोग्राफी में मोशन पिक्चर कैमरे की जरूरत होती है, जो अन्य कैमरों से कहीं अलग होता है. इसका बखूबी उपयोग वही कर सकता है, जिसने इसका अच्छे से प्रशिक्षण लिया हो. सिनेमेटोग्राफर डायरेक्टर के साथ सीन को विजुलाइज करता है. दिन, रात, सुबह, शाम, बारिश और आंधी जैसे सीन को कब और किस एंगल से लेना है, इसमें उसे महारथ हासिल होती है.

फैशन डिज़ाइनर बनकर दें अपने करियर को नयी उड़ान

आज स्टंट सीन सिनेमेटोग्राफी का बढ़िया उदाहरण हैं. ऎसे सीनों का अधिकांश फिल्मों में बहुत उपयोग हो रहा है. फिक्शन, एडवरटाइजिंग और डॉक्यूमेंट्री फिल्म के लिए कैमरे का कैसे प्रयोग करना है, इसकी उसे पूरी-पूरी जानकारी होती है. जिसे कैमरे की बारीकियों की जानकारी हो, इस फील्ड में उसका स्वागत है

जानें तकनीकी अंतर

सिनेमेटोग्राफी और फोटोग्राफी दोनों के बीच तकनीकी अंतर है. आप जब चलते-फिरते दृश्यों को लाइटिंग का ध्यान रखते हुए डिजिटल कैमरे में कैद करते हैं, तो इसे सिनेमेटोग्राफी कहते है.

इसमें मोशन पिक्चर कैमरे का उपयोग होता है, जो सामान्य कैमरों से अलग होता है. प्लेसमेंट, सेट या लोकेशन पर लाइटिंग की व्यवस्था, कैमरा एंगल आदि को ध्यान में रखते हुए सिनेमेटोग्राफर डायरेक्टर के साथ सीन विजुअलाइज करता है.

आमदनी

शुरूआती दौर में 15-20 हज़ार रुपए मिलते हैं. जितना अच्छा आपका काम होगा उस हिसाब से आपकी पेमेंट होगी. एक्सपिरिएंस के साथ-साथ सैलरी भी बढ़ती है, जो की आगे चलकर लाखों में हो सकती है.

प्रमुख संस्थान

फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टिट्यूट ऑफ़ इंडिया, पुणे

सत्यजित रे फिल्म इंस्टिट्यूट, मुंबई

एशियन अकादमी ऑफ़ फिल्म एंड टेलीविजन, नोएडा

चेन्नई फिल्म इंस्टिट्यूट, तमिलनाडू

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Author: Karishma

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