दिल्ली सरकार के मंत्रियों की टेबल पर धूल फांक रही 180 फाइलें

दिल्ली में इस समय इस बात की बहस हो रही है कि कौन काम नहीं कर रहा है? अधिकारी काम नहीं कर रहे हैं या फिर सरकार काम नहीं कर रही है। दैनिक जागरण ने इसे लेकर दिल्ली सरकार के सभी विभागों में जाकर अलग-अलग जानकारी जुटाई तो पता चला कि विभिन्न विभागों से 180 फाइलें मंत्रियों के पास स्वीकृति के लिए भेजी गई थीं। जो उनके टेबल पर धूल चाट रही हैं।

काम कौन नहीं कर रहा है मंत्री या अधिकारी

इनमें परिवहन, ऊर्जा व शहरी विकास विभाग में 81 अति महत्वपूर्ण फाइलें शामिल हैं। जिनमें से कुछ मामले तो पॉलिसी से भी संबंधित हैं। मगर मंत्री उन्हें लेकर बैठे हुए हैं। ऐसे में सहज ही अनुमान लगाया जा सकता है कि काम कौन नहीं कर रहा है मंत्री या अधिकारी। मंत्रियों के पास उन मामलों की फाइलें भी हैं जिनकी जनता को सख्त जरूरत है।


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परिवहन क्षेत्र की स्थिति सबसे खराब

इनमें परिवहन विभाग की सबसे अधिक 14 फाइलें हैं। इस विभाग के मंत्री कैलाश गहलोत हैं। जब ये मंत्री बने थे तो दावा कर रहे थे कि परिवहन के क्षेत्र में क्रांति लाएंगे। मगर इनकी स्थिति सबसे खराब है। इनके पास मोटर वाहन एक्ट में संशोधन किए जाने की फाइल 24 अप्रैल से पेंडिंग है।

वातानुकूलित बसों में यात्रा करने के लिए रियायती पास से संबंधित फाइल भी स्वीकृति के लिए 8 मई से पड़ी हुई है। अवैध स्कूल वैनों पर अंकुश लगाने की फाइल 9 मई से मंत्री के पास है। पार्किंग पॉलिसी की फाइल भी मंत्री के पास है। ऑटो रिक्शा के किराये से संबंधित फाइल 1 मई से मंत्री के पास पेंडिंग है।

गौरतलब है कि दिल्ली सरकार के मंत्री बार बार आरोप लगा रहे हैं कि अधिकारी उनके साथ सहयोग नहीं कर रहे हैं, जबकि कई महत्वपूर्ण योजनाओं की फाइलें उन्हीं के पास पड़ी हैं।

– मंत्री गोपाल राय के पास विकास विभाग की 3 फाइलें पेंडिंग हैं।

– मंत्री सत्येंद्र जैन के पास 17 फाइलें पेंडिंग हैं। इसमें स्वास्थ्य विभाग की 1, ऊर्जा की 1, गृह विभाग की 2, शहरी विकास विभाग की 11, दिल्ली शहरी

आश्रय सुधार बोर्ड की 2 फाइलें पेंडिंग हैं।

– मंत्री कैलाश गहलोत के पास 24 फाइलें पेंडिंग हैं। परिवहन विभाग की 14, आइटी की 2 व राजस्व की चार फाइलें भी पेंडिंग हैं।

– मंत्री इमरान हुसैन के पास खाद्य एवं आपूर्ति विभाग की 5 फाइलें हैं।

– मंत्री राजेंद्र पाल गौतम के पास चुनाव आयोग से संबंधित एक फाइल है। 

जल्द हालात सुधरने के नहीं दिखते आसार

वहीं, देश की राजधानी दिल्ली में मचे राजनीतिक और प्रशासनिक घमासान के बीच सबकी निगाहें अब सीएम अरविंद केजरीवाल के इस रुख पर लगी हैं कि वे पिछले एक सप्ताह से चल रहे विवाद खत्म करने के लिए दिल्ली के आइएएस अधिकारियों को बुलाते हैं या नहीं। इस कड़ी में मंगलवार को आइएएस अधिकारियों ने कहा कि वे औपचारिक बातचीत के लिए अरविंद केजरीवाल के बुलावे का इंतजार कर रहे हैं। बताया जा रहा है कि ये संभावित बैठक दिल्ली सचिवालय में बुलाई जा सकती है और इसमें फरवरी महीने में मुख्य सचिव अंशु प्रकाश के साथ हुई बदसलूकी से बने हालात के बाद कोई परिणाम निकलेगा।

आइएएस अधिकारियों की ओर से यह बयान तब आया है जब एक दिन पहले ही दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने उपराज्यपाल अनिल बैजल से बैठक बुलाने की गुजारिश की है, ताकि दिल्ली सरकार और अधिकारियों के बीच गतिरोध को खत्म किया जा सके।

मनीष सिसोदिया की पहल के बाद अब आइएएस अधिकारी दिल्ली के सीएम के साथ बैठक की बाट जोह रहे हैं, जिसमें उम्मीद है कि वे उनकी सुरक्ष को जरूरी कदम उठाने के बारे में बात करेंगे।

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Author: Desk

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