…तो इस बड़ी वजह से अटल की राह चलेंगे पीएम मोदी, समय से पहले करायेंगे चुनाव

क्या मोदी सरकार इसी साल के अंत में लोकसभा चुनाव कराने का मूड बना चुकी है? क्या एक साथ चुनाव की जो बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी कहते आए हैं उसे वे इस साल के आखिर में काफी हद तक लागू भी कर सकते हैं? राष्ट्रपति का आज का अभिभाषण और सरकार से मिल रहे संकेतों को कांग्रेस व अन्य विपक्षी पार्टियां डिकोड करने में लगी हैं और उनका कहना है कि अगर ऐसा होता है तो कोई आश्चर्य नहीं होना चाहिए.

इसी साल के अंत में लोकसभा चुनाव

राष्ट्रपति के अभिभाषण से संकेत मिले

गौरतलब है कि आज बजट सत्र के पहले दिन राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने अपने पहले अभिभाषण में जब सरकार की पिछले पौने चार साल की उपलब्धियां गिनाईं तो उसमें एक साथ चुनाव की पीएम मोदी की बात दोहराई. राष्ट्रपति ने एक साथ चुनाव की वकालत करते हुए कहा कि हर समय चुनाव का असर विकास पर पड़ता है.


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समय से पहले वाजपेई ने कराया था चुनाव

गौरतलब है कि 2004 में तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी ने भी समय से पहले लोकसभा चुनाव कराया था. लेकिन बीजेपी को हार का मुंह देखना पड़ा था और मनमोहन सिंह के नेतृत्व में कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की थी. अब एक बार फिर देश की सत्ता पर काबिज नरेंद्र मोदी अटल की राह पर कदम बढ़ाने के मूड में नजर आ रहे हैं.

एक देश एक चुनाव के पक्ष में पीएम मोदी

बीजेपी पिछले कुछ समय से केंद्र और राज्यों की विधानसभा के चुनाव एक साथ कराने की बात कहती आई है और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दिनों दिए अपने एक इंटरव्यू में इसकी पुरजोर वकालत की थी.

पीएम मोदी का तर्क है कि भारत जैसे विशाल देश में हर समय किसी न किसी प्रदेश में चुनाव चल रहे होते हैं और आचार संहिता लगी होती है जिसके चलते विकास के काम रुक जाते हैं. इसके अलावा केंद्र व राज्य के अलग-अलग चुनाव कराने से संसाधनों का भी काफी खर्च होता है जिसे बचाया जा सकता है.

राज्यों के साथ आम चुनाव

इस साल के अंत में मध्यप्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़ में विधानसभा चुनाव होने हैं. जबकि इसी साल अप्रैल में कर्नाटक और मिजोरम में विधानसभा चुनाव होने हैं. वहीं अगले साल 2019 में आंध्र प्रदेश, अरुणांचल, उड़ीसा, सिक्किम, महाराष्ट्र, हरियाणा, जम्मू-कश्मीर और झारखंड के विधानसभा चुनाव होने हैं. ऐसे में विपक्षी दलों को लगता है कि नरेंद्र मोदी अपनी रणनीति से एक बार फिर विपक्ष को चौंका सकते हैं और केंद्र के चुनाव भी इन राज्यों के साथ कराकर अपने खिलाफ किसी बड़े माहौल के बनने से पहले ही जीत हासिल कर दोबारा सत्ता का काबिज होने का दांव चल सकते हैं.

विपक्ष की आशंका

आज जिस तरह बजट सत्र के छोटा रहने पर लोकसभा में कांग्रेस के नेता मल्लिकार्जुन खड़गे ने नाखुशी जताई उससे भी कांग्रेस की मोदी सरकार के जल्द चुनाव को लेकर आशंका झलकती है. बता दें कि आरजेडी प्रमुख लालू प्रसाद यादव तो काफी पहले से ही मोदी सरकार पर 2018 में लोकसभा चुनाव कराने की शंका जाहिर करते रहे हैं. इतना ही नहीं पिछले 15 दिनों में सपा प्रमुख अखिलेश यादव से लेकर बीएसपी सुप्रीमो मायावती ने भी मोदी सरकार पर इसी साल चुनाव कराने की आशंका जाहिर की है.

कांग्रेस नहीं राजी

कांग्रेस की लोकसभा चुनाव को 2019 में कराने के पक्ष में है. कांग्रेस की मंशा है कि जितनी देर में चुनाव होंगे, उतना ही उसे मोदी सरकार के खिलाफ माहौल बनेगा और उसे सियासी फायदा मिल सकता है. इसीलिए राज्यों के विधानसभा चुनाव के साथ लोकसभा चुनाव नहीं चाहती है.

कांग्रेस को एक शंका और भी है कि जिन बीजेपी शासित राज्यों में साल के आखिर में चुनाव हैं, वहां राज्य की सत्ताधारी सरकार के खिलाफ विरोधी माहौल मानकर कांग्रेस चल रही है. ऐसे में अगर विधानसभा के साथ लोकसभा चुनाव होते हैं, मोदी के नाम पर राज्य सरकार की खामिया दब जाएंगी.

हालही में देश के सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री के लिए एक सर्वे किया गया था, जिनमें बीजेपी के रमन सिंह को सिर्फ 5 फीसदी लोगों ने ही बेस्ट मुख्यमंत्री माना था. जबकि इस फेहरिस्त में राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे और एमपी के शिवराज सिंह अपनी जगह नहीं बना सके.

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Author: Ashutosh Mishra

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