व्यंग्य: तोगड़िया जी, पाण्डेय जी और मौलाना

विश्व हिन्दू परिषद के नेता प्रवीण भाई तोगड़िया के साथ हुए हादसे को लेकर पाण्डेय जी बहुत परेशान थे. उन्हें चिंता थी कि इतनी तगड़ी सुरक्षा में रहने वाला व्यक्ति भला असुरक्षित कैसे हो सकता है. किसी भी राज्य की पुलिस इतनी निरंकुश कैसे हो सकती है कि तोगड़िया जी जैसे हिन्दू नेता का एनकाउंटर कर दे. नहीं, ऐसा नहीं हो सकता. कोई कहता क्यों नहीं कि यह सब झूठ है.

प्रवीण भाई तोगड़िया

अपने जिगरी दोस्त मौलाना से पाण्डेय जी बोले- सुरक्षा में लगे एक-एक जवान के खिलाफ सख्त से सख्त कार्रवाई होनी चाहिए. जिसकी सुरक्षा ही इनकी अंतिम जिम्मेदारी है, भला वही अपने घर से इन सबकी आँखों में धूल झोंककर इसलिए निकल गया क्योंकि उसकी जान को खतरा था. अरे भाई तोगड़िया जी, इतने सुरक्षाकर्मियों के साथ आप सुरक्षित नहीं हो, तो भला वो टेम्पो वाला आपको कहाँ से और कैसे सुरक्षा देता? शुक्र है ऊपर वाले का, आप सकुशल बेहोश ही सही, मिल तो गए, नहीं तो देश में न जाने क्या-क्या होता. मैं तो यही सोचकर परेशान, हैरान हो चला था. खैर, आपकी सकुशल वापसी ने हमें बहुत राहत दी. पर, आपने अकेले घर से निकल कर अच्छा नहीं किया. आगे से ध्यान रखिएगा. यह गलती दोबारा न हो. देश आपके साथ है. किस राज्य की पुलिस में इतनी हिम्मत आ गई जो आपका एनकाउंटर कर दे. ना बाबा ना. हमारा तो सोच के ही दिल बैठा जा रहा है.


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मौलाना ने कहा- अमाँ पंडित, तुम रहियो मूरख के मूरख. कभी थोड़ी सी अपनी अकल भी लगा लिया करो. असल में अपने मोदी जी भाव तो दे नहीं रहे हैं इनको. साढ़े तीन साल से फुल पॉवर में चल रहे मोदी जी हुलसाने से भी मंदिर पर कुछ बोलते नहीं. वे तो अपने तरीके से देश की तरक्की में जुटे हैं. अब उनकी ही पार्टी, सहयोगी संगठन के लोग मोदी जी को पचा नहीं पा रहे हैं. पान का बीड़ा मुँह में दबाकर पाण्डेय जी बोले-तुम मौलाना चुप हो जाओ. जानते कुछ नहीं लेकिन जानकार बनने का नाटक जरूर करते हो. ताव में आए मौलाना ने बोला- तो तुम्हीं बता दो, तुम्हारे तोगड़िया साहब ई सब क्यों किए. पाण्डेय जी जवाब दे ही रहे थे, तब तक पोते ने उठा दिया. उसे स्कूल जो जाना था. पाण्डेय जी बुदबुदाए, ई मौलाना सपने में भी पीछा नहीं छोड़ रहा. हे भगवान!

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Author: Vatsaly

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