ग्रामीण क्षेत्रों में बिजली महंगी, पंजाब ने इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी 2 फीसदी बढ़ाई

चंडीगढ़. पंजाब सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2% का इजाफा किया है। 13 से बढ़ाकर 15% कर दिया है। बढ़ी हुई दर उपभोक्ताओं के सभी वर्गों पर लागू होगी। अधिसूचना जारी कर दी गई है। यह वृद्धि मार्च 2018 में मंत्रिमंडल द्वारा लिए गए एक निर्णय के मुताबिक की गई है। बढ़ी हुई दरें 1 अप्रैल 2018 से लागू होंगी। ग्रामीण उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई ड्यूटी से संबंधित बकाया राशि का भुगतान आने वाले महीनों में करना पड़ेगा।

शहरों को राहत, गांवों में बिजली हुई महंगी, ड्यूटी 13 से बढ़ा 15% की

चंडीगढ़/जालंधर/पटियाला.अगर आप नगर निगम या किसी शहर में रहते हैं तो आपके लिए राहत की खबर है और यदि आपका घर गांव में है तो आपकी जेब पर पंजाब सरकार ने बोझ बढ़ा दिया है। शुक्रवार को पंजाब सरकार ने अधिसूचना जारी कर राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में 2 फीसदी का इजाफा कर इसे 13 से बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया है। यानि अगर आपका बिल पहले 10 हजार रुपए आता है तो आपको अब 200 रुपए अतिरिक्त देने होंगे। बढ़ी हुई यह दरें उपभोक्ताओं के सभी वर्गों पर लागू होंगी। यहीं बस नहीं, यह वृद्धि भी 1 अप्रैल 2018 से लागू होगी। इस प्रकार अब ग्रामीण उपभोक्ताओं को बढ़ी हुई ड्यूटी से संबंधित बकाया राशि का भुगतान आने वाले महीनों में करना पड़ेगा। बता दें, इलेक्ट्रिसिटी रेगुलेटरी कमीशन ने अप्रैल 2018 में प्रदेश के उपभोक्ताओं के लिए 2018-19 से संबंधित बिजली दरों की घोषणा की थी। उस वक्त बिजली की दरों में 2.17 फीसदी की वृद्धि की गई थी। इसके अनुसार घरेलू बिजली 10 से 14 पैसे जबकि औद्योगिक बिजली 10 से 13 पैसे प्रति यूनिट महंगी हुई थी। अब इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी में वृद्धि का यह नया बोझ ग्रामीणों पर पड़ा है। इस वक्त औसत 6.50 रुपए प्रति यूनिट की दर से बिजली सप्लाई हो रही है। इस प्रकार 2 फीसदी ड्यूटी वृद्धि से काफी बोझ उपभोक्ताओं पर पड़ेगा।


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सरकार को होगी 200 करोड़ रुपए की आमदनी

बढ़ी दरों के अनुसार जो लोग नगर निगमों और शहरों की हदों से बाहर हैं, उन्हें घरेलू कनेक्शन पर अतिरिक्त 14 पैसे, इंडस्ट्री के मीडियम सप्लाई कनेक्शन पर 10 पैसे और इंडस्ट्री के स्माल पावर कनेक्शन पर 11 पैसे देने होंगे। बिजली ड्यूटी पर इजाफे से सूबा सरकार साल में करीब 200 करोड़ रुपये अतिरिक्त कमाएगा। प्रदेश में सिर्फ घरेलू ही 72 लाख बिजली कनेक्शन हैं। इनमें से करीब 28 लाख नगर निगमों की हदों से बाहर हैं।

कारोबारी संगठनों में रोष

सरकार के इस फैसले पर कारोबारियों ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। इसकी वजह यह है कि अब जो फैक्ट्री शहरों में हैं, इनका बिजली खर्च 2 परसेंट कम रहेगा और जो ग्रामीण इलाकों में फैक्ट्रियां कारोबारियों ने लगा रखी हैं उनका खर्च 2 परसेंट बढ़ जाएगा। ऐसे में वस्तुओं के दाम में भी अंतर हो जाएगा। ग्रामीण इलाकों के कारोबारियों को शहरी प्रोडक्ट् को कंपीटीशन देने के लिए अब खरीददारों के रेट्स को लेकर प्रैशर झेलना होगा।

एक हाथ से कारोबारियों को फायदा दिया, दूसरे से लिया
पावर एक्सपर्ट विजय तलवाड़ कहते हैं कि इससे सरकार को तो आमदन होगी लेकिन आम जनता पर बोझ बढ़ गया है। सूबा सरकार ने इंडस्ट्री को 5 रुपए बिजली देने का वादा किया था। उसने सेल ऑफ पावर तो 5 रुपए में दे दी लेकिन साथ में फिक्स चार्जेज लागू कर दिए। एक हाथ से इंडस्ट्री को दिया और दूसरे हाथ से ले लिया, छोटी इंडस्ट्री को आखिरकार ज्यादा ही पैसे देने पड़े।

इधर अकाली दल ने कहा, सरकार बढ़ाए बिजली दरें वापस ले नहीं तो संघर्ष करेंगे

शिरोमणि अकाली दल ने इस वृद्धि की निंदा करते हुए कहा कि कांग्रेस के एक साल के कार्यकाल में बिजली दरों व करों में बढ़ोतरी से बिजली 17 से 20 फीसदी तक महंगी हो चुकी है। दल के वरिष्ठ नेता और पंजाब के पूर्व वित्त मंत्री परमिंदर सिंह ढींढसा ने इस वृद्धि की निंदा करते हुए इसे तुरंत वापस लेने की मांग की है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सरकार लगातार लोक विरोधी फैसले ले रही है, जिन्हें अकाली दल लोगों की कचहरी में लेकर जाएगा।

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Author: Web_Wing

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