गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश को मरणोपरांत अशोक चक्र, राष्ट्रपति नहीं रोक पाए आंसू

बिहार के रोहतास जिले के भारतीय वायु सेना (आईएएफ) के गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला, जो जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ते हुए शहीद हो गए थे, उन्हें शुक्रवार को मरणोपरांत अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। यह शांति के समय दिया जाना वाला देश का सबसे बड़ा सैन्य सम्मान है। राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने नई दिल्‍ली में राजपथ पर आयोजित 69वें गणतंत्र दिवस समारोह के दौरान निराला की पत्नी को यह सम्मान प्रदान किया।

गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश

गरुड़ कमांडो ज्योति प्रकाश निराला

इस सम्मान को लेने के लिए शहीद निराला की मां और पत्नी पहुंचे थे। जैसे ही उनका नाम पुकारा गया मंच पर बैठे राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आंखें भर गईं। राष्ट्रपति की भावुक होने की ये तस्वीर कैमरे में कैद हो गई। तस्वीर में राष्ट्रपति रूमाल से अपनी आंखें पोंछते नजर आ रहे हैं। इस लम्हे में केवल राष्ट्रपति कोविंद ही भावुक नहीं हुए, शहीद निराला की मां और पत्नी भी सम्मान पाकर और अपने पति की वीर गाथा सुनकर भावुक हो गईं।

अशोक चक्र पाने वाले एयरफोर्स के पहले गरुड़ कमांडो


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भारतीय वायुसेना के इतिहास में यह पहला अवसर था, जब किसी गरुड़ कमांडो को अशोक चक्र से सम्मानित किया गया। गरुड़ कमांडो जेपी निराला तीन महीने पहले ही आतंकरोधी अभियान के तहत स्पेशल ड्यूटी पर कश्मीर के हाजिन में सेना के साथ तैनात थे। श्रीनगर में इसी ऑपरेशन के दौरान सेना की तरफ से की गई कर्रवाई में आतंकी मसूद अजहर के भतीजे तल्हा रशीद को मारा गया था।

भारतीय वायुसेना के विशेष बल के कमांडो ने जम्मू एवं कश्मीर में आतंकवादियों से लड़ाई के दौरान अदम्य साहस और शौर्य का परिचय देते हुए शहीद हो गए थे। वे 18 नवंबर 2017 को बांदीपोरा जिले के चंदरनगर गांव में गरुड़ की टुकड़ी और राष्ट्रीय राइफल द्वारा संयुक्त रूप से शुरू किए गए एक आक्रामक अभियान का हिस्सा थे।

गरुड़ की टुकड़ी ने जिस घर में आतंकवादी छिपे हुए थे, वहां चारों ओर से घात लगाया। निराला ने खुद को आतंकवादियों के ठिकाने के पास रखा, ताकि आतंकवादी बच कर नहीं निकल पाए। जब सैन्य टुकड़ी आतंकवादियों के बाहर निकलने का इंतजार कर रही थी, तभी छह आतंकवादी बाहर भागते हुए आए और सैनिकों पर उन्होंने अंधाधुंध गोलियां बरसाई और हथगोले फेंकना शुरू कर दिए।

निराला ने लश्कर-ए-तैयबा के दो आतंकवादियों को मार गिराया और दो को घायल कर दिया। मुठभेड़ के दौरान वह भी गोली लगने से घायल हुए। गंभीर रूप जख्मी होने के बावजूद निराला ने गोलीबारी करनी जारी रखी और आखिरकार दम तोड़ दिया। इस दौरान सभी छह आतंकवादी मारे गए।

2010 में हुई थी शादी

रोहतास जिले के काराकाट के बदलाडीह गांव के ज्योति ने साल 2005 में इंडियन एयर फोर्स ज्वाइन किया था। पांच साल के बाद साल 2010 में उनकी शादी सुषमा से हुई थी। उनकी चार साल की एक बेटी है। बहन बिंदू कुमारी, शशी कुमारी और सुनीता कुमारी की शादी की जिम्मेवारी भी ज्योति पर थी, लेकिन उससे पहले ही शहीद हो गए।

ज्योति के पिता तेज नारायण सिंह किसान हैं। वह गांव पर ही रहते हैं। ज्योति शदीद होने से 20 दिन पहले अपने गांव से ड्यूटी के लिए गए थे।

गांव में लगे थे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारे

ज्योति के शहीद होने के बाद पार्थिव शरीर जब उनके गांव पहुंचा था तो देखते ही भीड़ ज्योति अमर रहे पाकिस्तान मुर्दाबाद के नारा लगाने लगी। ज्योति का अंतिम संस्कार पैतृक गांव में ही किया गया था। ज्योति के पिता ने मुखाग्नि दी थी।

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Author: Vatsaly

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