कट जाता है आपके अकाउंट में आने से पहले सैलरी से इतना पैसा

सैलरी स्लिप एक बेहद जरूरी डॉक्युमेंट होता है। लास्ट सिक्स मंथ की सैलरी स्लिप हर व्यक्ति के पास होना चाहिए। सैलरी स्लिप के जरिए आप अपनी इनकम और डिडक्शन देख सकते हैं। यदि इसमें आपको कुछ समझ न आए तो आप कंपनी के एचआर से संपर्क कर सकते हैं।

सैलरी स्लिप एक बेहद जरूरी डॉक्युमेंट

आज हम बता रहे हैं कि आपकी सैलरी स्लिप में क्या-क्या होता है। आपको जितने भी अलाउंस मिलते हैं, उनमें सबसे इम्पोर्टेंट बेसिक सैलरी अलाउंस होता है। पीएफ डिडक्शन इसी अलाउंस पर डिपेंड करता है। आपके अकाउंट में आने से पहले ही सैलरी का एक बड़ा हिस्सा कट जाता है। यह अमाउंट पीएफ और दूसरी स्कीम्स का होता है। कंपनियों में अलग-अलग फेसिलिटीज के हिसाब से भी फंड डिडक्ट किया जाता है।


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बेसिक सैलरी

आपकी सैलरी का सबसे जरूरी कम्पोनेंट होता है बेसिक सैलरी। पीएफ और डियरनेस अलाउंस का डिडक्शन इसी के हिसाब से होता है। यह 100 परसेंट टैक्स के दायरे में आती है।

हाउस रेंट अलाउंस

जैसा नाम से ही कंफर्म है (हाउस रेंट अलाउंस HRA) इसमें इम्प्लॉई को हाउस रेंट के लिए अलाउंस मिलता है। HRA वैल्यू आपकी जॉब लोकेशन पर डिपेंड करती है। यदि आप किसी मेट्रो सिटी में जॉब कर रहे हैं तो आपका HRA हाई रहेगा। यदि आप अपने खुद के घर में रह रहे हैं तो 100 परसेंट एचआरए टैक्स के दायरे में आएगा। वहीं यदि आप रेंट से रहते हैं तो टैक्स से छूट मिलेगी।

कन्वीयंस अलाउंस

यह ट्रैवल अलाउंस होता है। घर से वर्कप्लेस पर आने के लिए जो खर्चा आता है, वो इसमें आता है।

मेडिकल अलाउंस

मेडिकल पर होने वाले खर्चे मेडिकल अलाउंस में आते हैं। इसमें संबंधित व्यक्ति को खर्चे का प्रूफ देना होता है। 15 हजार रुपए साल तक का खर्चा टैक्स के दायरे से बाहर है। इतने अमाउंट पर आपको टैक्स छूट मिलती है।

लीव ट्रैवल अलाउंस

छुट्टियों के दौरान ट्रैवलिंग का जो खर्चा आता है वो लीव ट्रैवल अलाउंस के तहत आता है। इस अलाउंस में आपकी फैमिली मेम्बर्स के ट्रैवल का खर्चा भी शामिल किया जाता है। यदि आप इसमें प्रूफ जमा कर देते हैं तो इस पर टैक्स नहीं लगता।

बोनस/ परफॉर्मेंस

यह एक ईयरली अवॉर्ड होता है। यह आपके परफॉर्मेंस पर बेस्ड होता है।

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ये होता है सैलरी का डिडक्शन पार्ट…

प्रॉविडेंट फंड

आपकी बेसिक सैलरी का 12 परसेंट पीएफ होता है। यह अमाउंट हर महीने इम्प्लॉइ की सैलरी से काटा जाता है। इसमें जितना अमाउंट इम्प्लॉई की सैलरी से कटता है, उतना ही अमाउंट इम्प्लॉयर भी इसमें मिलाता है।

प्रोफेशनल टैक्स

यह टैक्स कुछ राज्यों में वसूला जाता है। इसमें कितना अमाउंट कटेगा, यह आपकी सैलरी पर डिपेंड करता है।

इनकम टैक्स

यह टैक्स हर महीने कटता है। इस टैक्स डिडक्शन को TDS के नाम से भ जाना जाता है। यह अमाउंट इनकम टैक्स डिपार्टमेंट को इम्प्लॉयर द्वारा दिया जाता है। अलग-अलग टैक्स सेविंग इन्वेस्टमेंट्स का यूज करके आप इसे कम कर सकते हैं।

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Author: Heena

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