एनपीए से जूझ रहे बैकों के लिए जेटली का ऐलान, सरकार देगी ‘1 लाख करोड़ रुपये’

डूबे हुए कर्ज यानी एनपीए से जूझ रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक की खस्ता वित्तीय हालत को दुरुस्त करने के मकसद से सरकार ने इन बैंकों को चालू वित्त वर्ष में एक लाख करोड़ रुपये देने की घोषणा की। इसमें 80,000 करोड़ रुपये पुनर्पूजीकरण बांड के जरिए और 8,139 करोड़ रुपये बजटीय सहायता के रूप में शामिल है। केंद्रीय वित्तमंत्री अरुण जेटली ने कहा कि सरकार 10,312 करोड़ रुपये बाजार से जुटाएगी।

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एनपीए से जूझ रहे सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक


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वित्तमंत्री बुधवार को सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के लिए पुनर्पूजीकरण योजना के संबंध में यहां पत्रकारों को जानकारी दे रहे थे।

सरकार ने विभिन्न अन्य बैंकों समेत आईडीबीआई को 10,610 करोड़ रुपये, भारतीय स्टेट बैंक को 8,800 करोड़ रुपये, बैंक ऑफ बड़ौदा को 5,375 करोड़ रुपये, केनरा बैंक को 4,865 करोड़ रुपये और यूनियन बैंक को 4,524 करोड़ रुपये प्रदान किए हैं।

उन्होंने कहा, “हमने पीएसबी के पुनर्पूजीकरण अर्थात दोबारा पूंजी निर्माण के लिए अक्टूबर 2017 में 2.11 लाख करोड़ रुपये की योजना की घोषणा की थी। मैंने इसके लिए पहले ही संसद में अनुपूरक अनुदान पारित किया है। इस पूरी कवायद का मकसद यह है कि पीएसबी की सेहत को बेहतर बनाना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है।”

उन्होंने कहा, “हमें काफी बड़ी समस्या विरासत में मिली है। हमारा मकसद समाधान तलाशना और एक ऐसी संस्था का निर्माण करना था, जिससे दोबार भूल न हो।”

बैंकिंग सचिव राजीव कुमार ने कहा कि पुनर्पूंजीकरण योजना से सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों की कारोबार की साख क्षमता में पांच लाख करोड़ रुपये का इजाफा होगा।

आर्थिक मामलों के सचिव सुभाष चंद्र गर्ग ने कहा कि पुनर्पूजीकरण योजना नकदी निरपेक्ष होगी और इस प्रकार जारी बांड गैर-वैधानिक तरलता अनुपात (एसएलआर) व खरीद-बिक्री नहीं करने योग्य होंगे।

जेटली ने कहा कि पुनर्पूजीकरण की योजना बनाते समय सरकार के दो उद्देश्य थे। पहला, किन बैंकों को कितना धन चाहिए और दूसरा, जो कुछ भी अतीत में हुआ, जिसके कारण एनपीए की नौबत आई, उसकी पुनरावृत्ति न हो।

उन्होंने कहा कि इसके लिए यह सुनिश्चित किया जाएगा कि बैंक विभिन्न प्रकार के कदम उठाएंगे, जिससे बैंकों की व्यवस्था का उच्च मानदंड कायम हो।

पुनर्पूजीकरण की योजना के साथ-साथ कड़ी कार्रवाई के बिंदुओं के साथ छह विषय भी इस सुधारपरक पैकेज में शामिल होंगे। इन छह विषयों में ग्राहकों की प्रतिक्रियाशीलता, जिम्मेदार बैंकिंग प्रणाली, कारोबारी साख, पीएसबी को उद्यमी मित्र के रूप में पहचान, वित्तीय समावेशन, डिजिटीकरण, ब्रांड पीएसबी के लिए कर्मियों का कौशल विकास शामिल हैं।

राजीव कुमार ने कहा कि देश के 21 पीएसयू बैंकों का बैंकिंग क्षेत्र में 70 फीसदी योगदान है।

कुमार ने कहा, “जैसा कि पहले कहा गया है कि पुनर्पूजीकरण का आधार बैंक का प्रदर्शन होगा। साथ ही, उसकी विशिष्टता को भी ध्यान में रखा जाएगा।”

उन्होंने कहा कि 250 करोड़ रुपये से अधिक के कर्ज पर विशेष निगरानी रखी जाएगी। साथ ही, बैंक को कंसोर्टियम लोन के लिए 10 फीसदी आरक्षित रखना होगा।

पहले जहां कुछ लोग 13-14 बैंकों से कर्ज लेते थे, वहीं अब वे सिर्फ छह-सात बैंकों से ही कर्ज ले सकते हैं।

खतरों के संबंध में उन्होंने कहा कि सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों में जमाकर्ताओं का धन सुरक्षित है।

उन्होंने कहा कि पीएसबी को कर्ज की जिम्मेदारी भी होनी चाहिए, ताकि डूबे हुए कर्ज की कोई समस्या पैदा न हो।

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Author: Ashutosh Mishra

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