इस गाँव में बसिये मिलेंगे 45 लाख रुपए, ये है वजह

भारत सहित दुनिया के ज्यादातर देशों के लोग गाँव छोड़कर शहर की और पलायन कर रहे हैं. वहीँ स्विटजरलैंड का एक गांव यहां परिवार को बसाने के लिए 45 लाख रुपए की रकम ऑफर करने जा रहा है. दरअसल यहां का माउंटेन विलेज अल्बिनेन लोगों की कमी से जूझ रहा है. शहरी जिंदगी के लिए लोग गांव छोड़ रहे हैं और अब यहां सिर्फ 240 लोग बचे हैं. ऐसे में यहां की लोकल अथॉरिटी 45 से कम उम्र के लोगों के लिए यहां बसने का ऑफर देने जा रही है. स्विटजरलैंड का ये गांव सी लेवल से 4265 फीट की ऊंचाई पर बसा है. यहां चर्च से लेकर कई सारे पारंपरिक किस्म के मकान बने हैं.

45 लाख रुपए

यहाँ के म्युनिसिपलिटी प्रेसिडेंट बीट जोस्ट ने कहा कि शांति, खूबसूरत नजारे और ताजगी भरी हवाएं इस गांव की खासियतों में शामिल हैं. नौकरी के मौकों की कमी के चलते ये गांव खाली होता जा रहा है. जोस्ट के मुताबिक, पिछले कुछ साल में यहां से तीन परिवार और चले गए, जिसके चलते गांव का स्कूल तक बंद हो गया.


हमसे फेसबुक पर भी जुड़ें!


अब सिर्फ अल्बिनेन में 240 लोग ही बचे रह गए हैं, जिसमें सात ही बच्चे हैं. ये रोज बस के जरिए पास के एक टाउन में मौजूद स्कूल में पढ़ने के लिए जाते हैं. जोस्ट अब इस गांव में खाली पड़े मकानों के लिए 45 से कम उम्र के लोगों की तलाश कर रहे हैं. यहां आने वाले लोग अपनी जमीन खरीदकर भी प्रॉपर्टी बनवा सकते हैं.

कैश इनीशिएटिव की डिमांड

यहां रहने वाले कुछ युवाओं ने अगस्त में पिटीशन लॉन्च किया है, जिस पर गांव के करीब आधे वोटर्स ने साइन भी किया है. इसमें म्युनिसिपलिटी से गांव छोड़ रहे लोगों के लिए प्रोत्साहन के तौर पर कैश मांगा है.

45 लाख रुपए

इसे लेकर 30 नवंबर को म्युनिसिपल काउंसिल में वोट डाले जाने हैं. प्रोत्साहन राशि के तहत 45 से कम उम्र से सभी को मकान बनवाने, खरीदने या मरम्मत कराने का फायदा है.

अगर म्युनिसिपल काउंसिल प्लान को मंजूरी दे देती है, तो 45 की उम्र से ज्यादा के शख्स को 16 लाख रुपए और प्रति बच्चे के हिसाब से साढ़े 6 लाख रुपए देगी. इसका मतलब है कि दो बच्चों के साथ वाला कपल इस गांव में शिफ्ट होने का फैसला लेता है, तो उसे 45 लाख रुपए का फायदा मिलेगा.

माननी पड़ेंगी ये शर्तें

हालांकि, इस सब्सि़डी का फायदा लेने के लिए यहां शिफ्ट होने वाले लोगों को गांव के कुछ नियम-कायदे भी फॉलो करने होंगे.

जर्मनी का ‘चिपको आंदोलन’, जंगल बचाने के लिए पेड़ों पर रहते हैं लोग

जोस्ट ने कहा कि यहां आने वाला कोई भी मकान खरीदने के बाद या 10 साल बाद भी अगर गांव छोड़कर जाता है तो उसे पूरी रकम वापस करनी होगी.

loading...

Author: Akash Trivedi

Share This Post On

Submit a Comment

Your email address will not be published. Required fields are marked *

X
loading...