इकोनॉमी की तस्वीर बदल सकता है निर्यात, ये पांच राज्य दे रहे उदाहरण

बजट सत्र के पहले दिन सोमवार को आर्थ‍िक सर्वे पेश किया गया. सर्वेक्षण में कहा गया है कि आने वाले समय में इकोनॉमी की स्थ‍िति सुधारनी है, तो निर्यात पर खास ध्यान देने की जरूरत है. इसमें कहा गया है कि निर्यात बढ़ने से न सिर्फ इकोनॉमी को फायदा होगा, बल्क‍ि इससे आम नागरिकों का जीवन स्तर भी सुधरेगा.

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इकोनॉमी की स्थ‍िति


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सर्वे में निर्यात के मामले में सबसे बेहतर प्रदर्शन कर रहे राज्यों के बारे में भी बताया गया है. सर्वेक्षण के बाद ये उम्मीद जताई जा रही है कि सरकार बजट में इस मोर्चे पर खास ध्यान दे सकती है.

यह पहली बार है जब इकोनॉमिक सर्वे में राज्यों के अंतरराज्यीय और अंतरराष्ट्रीय निर्यात के आंकड़े पेश किए गए हैं. इस डाटा से सामने आया है कि देश के पूरे निर्यात में महज 5 राज्यों का 70 फीसदी योगदान है.

टॉप 5 निर्यातक

इसमें महाराष्ट्र, गुजरात, कर्नाटक, तमिलनाडु और तेलंगाना शामिल है. सर्वे में एक नई बात यह भी सामने आई है कि बेहतर निर्यात का असर जीवन स्तर पर पड़ता है. सर्वे के मुताबिक इन 5 राज्यों में जीवन स्तर काफी सुधरा है.

टॉप 5 आयातक

दूसरी तरफ, अंतरराज्यीय स्तर पर निर्यात करने वाले राज्यों में महाराष्ट्र, गुजरात, हरियाणा, तमिलनाडु और कर्नाटक शामिल हैं. वहीं निर्यात के मामले में भी महाराष्ट्र, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश, कर्नाटक और गुजरात सबसे आगे हैं. इन आंकड़ों के आधार पर सर्वे में दो निष्कर्ष निकाले गए हैं.

पहला, जो राज्य सबसे ज्यादा निर्यात करते हैं, वे आयात भी अध‍िक करते हैं. दूसरा, जो राज्य सबसे ज्यादा व्यापार करते हैं, वे ज्यादा प्रतिस्पर्धी हैं और कारोबार से ज्यादा मुनाफा कमाने में कामयाब हैं.

निर्यात अर्थव्यवस्था के लिए ज़रूरी

सर्वे में कहा गया है कि आने वाले दिनों में निर्यात अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने में अहम भूमिका निभा सकता है. सर्वे में निर्यात की स्थ‍िति सुधारने पर जोर दिया गया है. इसमें कहा गया है कि सरकार को निर्यात के मोर्चे पर जरूरी सुधार करने चाहिए, ये सुधार काफी फायदेमंद साबित होंगे.

1 फरवरी को पेश होने वाले आम बजट में भी वित्त मंत्री अरुण जेटली निर्यात को लेकर अहम घोषणाएं कर सकते हैं. इसकी एक वजह यह है कि पिछले साल निर्यात और आयात के आंकड़ों में काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. दूसरी तरफ, कृष‍ि क्षेत्र की खराब स्थ‍िति के लिए निर्यात के सुस्त आंकड़े भी जिम्मेदार हैं.

ऐसे में वित्त मंत्री अरुण जेटली का फोकस आयात घटाने और निर्यात बढ़ाने पर हो सकता है. ऐसे में उनसे इस मोर्चे पर कई अहम घोषणाओं की उम्मीद की जा सकती है.

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Author: Ashutosh Mishra

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