इंसेफेलाइटिस: 40 साल पुराना मर्ज, 50 हजार मौतें, कोई नहीं पूछने वाला

देश और प्रदेश में एक ही पार्टी की सरकार. ऐसा पहले भी हुआ है. लेकिन जो नहीं हुआ, वो 40 साल पुराने मर्ज इंसेफेलाइटिस के समूल नाश की कोशिश है. एक बार फिर यह मुद्दा गर्माया. लेकिन इस बार दर्द ज्यादा गहरा है. इतना कि पूरा देश हिल गया. इसी मुद्दे पर वरिष्‍ठ पत्रकार दिनेश पाठक ने ‘देश का मन’ के जरिए आम जनता की आवाज राजनीति के गली-कूचों तक पहुंचाने की कोशिश की है.

देश का मन क्या कहता है…

वरिष्‍ठ पत्रकार के मुताबिक,


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देश को हिलाकर रख देने वाली गोरखपुर की घटना में 30 बच्चों की जान इसलिए गई, क्योंकि मेडिकल कॉलेज में आक्सीजन की आपूर्ति ठप हो गई थी. कॉलेज प्रशासन ने 60 लाख रुपये से ज्यादा का भुगतान रोक लिया था. पूरी मशीनरी यह साबित करने में जुटी रही कि ये मौतें आक्सीजन की कमी की वजह से नहीं हुई हैं. हालाँकि सच यही है कि इन मौतों के पीछे आक्सीजन की कमी ही प्रमुख कारण थी.

इंसेफेलाइटिस

वैसे, 40 साल से ये मौतें हो रही हैं. लेकिन न तो कोई आगे बढ़कर जिम्मेदारी ले रहा है और न ही उसके उपाय किये जा रहे हैं. अन्यथा कोई कारण नहीं था कि गोरखपुर का मेडिकल कॉलेज इस देश के किसी भी बड़े मेडिकल कॉलेज से ज्यादा संसाधनों वाला होता. अब तक सूरत बदल चुकी होती.

मेडिकल कॉलेज का रिकार्ड ही 50 हजार से ज्यादा मौतों का गवाह है. उनका क्या, जो रस्ते में ही स्वर्ग सिधार गए और उनका क्या जो अस्पताल पहुंचे ही नहीं. सीधे घर से उनके शव दफन कर दिए गए. कोई शोर नहीं होता. कोई बदनामी नहीं होती अगर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ उसी समय मेडिकल कॉलेज पहुँच गए होते, जब हादसा सामने आया. एक दिन पहले महराजगंज वाली अपनी ही स्क्रिप्ट दोहरा देते, तब खबरें बनती दूसरे दिन भी एक्शन में योगी.

इंसेफेलाइटिस

शोध बताते हैं कि इन्सेफ़्लाइटिस नाम की बीमारी का मुख्य कारण गांवों में शुद्ध पेयजल की कमी, जलस्तर का काफी ऊपर होना, शौचालय का इस्तेमाल न होना और सफाई के प्रति जागरूकता की कमी है. हालांकि सब के सब मेडिकल कालेज के डॉक्टर कफील पर पिले पड़े हैं. यह बीमारी 1978 से अपना कहर बरपा रही है. हम दावे से कह सकते हैं कि तब से अब तक लगातार हो रही मौतों के लिए सभी राजनीतिक दल जिम्मेदार हैं. कांग्रेस, भाजपा, सपा, बसपा..सब.

अब राज्य में भाजपा की प्रचंड बहुमत की सरकार है. केंद्र में भी वही है. हमारे सीएम साहब भी उसी गोरखपुर से आते हैं. पांच बार के सांसद हैं..सब कुछ जानते हैं…पर मौतों की सच्चाई को स्वीकार करने में उन्हें तीन दिन लग गए. अफसरों ने उन्हें भी गुमराह किया और वे आसानी से हो भी गए.

इंसेफेलाइटिस

केंद्र सरकार के प्रमुख प्रोग्राम में शामिल है सफाई और शौचालय है. अगर शुद्ध पेयजल का एजेंडा जोड़ दिया जाए, तो इस महामारी से निपटना काफी हद तक आसान हो जाएगा. यह काम मौजूदा सरकार कर सकती है. योगी जी कर सकते हैं. उन्हें करना भी चाहिए था, बल्कि मुख्यमंत्री की शपथ लेने के तुरंत बाद उन्हें यही काम करना था. पर वे तो सस्ती लोकप्रियता वाले कार्यक्रमों में जुट गए और अब केवल बदनामी हाथ लग रही है.

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दिनेश पाठक 25 साल की पत्रकारिता का अनुभव रखते हैं. दो साल गोरखपुर में एक बड़े अखबार के संपादक रहे, इसलिए इंसेफेलाइटिस की असली वजह जानते-समझते हैं. उनका कहना है कि बिगड़ा अभी भी कुछ नहीं है. पूर्वांचल के लिए कुछ करिए और इस इंसेफेलाइटिस नाम के यमदूत से बच्चों को बचा लीजिए. नहीं तो आप भी शामिल हो जाएंगे बाकियों की कतार में..कुछ करिए..जरूर..

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Author: Vatsaly

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