अविरल गंगा के लिए 112 दिन से अन्‍न त्‍याग कर धरना दे रहे स्‍वामी सानंद का निधन

वाराणसी। अविरल गंगा के लिए बीते 112 दिन से अनशनरत स्वामी ज्ञानस्वरूप सानंद (प्रो. जी. डी. अग्रवाल) का एम्स ऋषिकेश में गुरुवार को निधन हो गया । स्वामी सानंद ने वाराणसी जिले में पर्यावरण व जल संरक्षण के लिए काफी योगदान दिया है। वह सोनभद्र में गोविंदपुर स्थित वनवासी सेवा आश्रम से भी जुड़े  थे। अविरल व निर्मल गंगा के लिए वह लंबे समय से आंदोलन को धार देने में जुटे हुए थे। इससे पूर्व भी गंगा की अविरलता और निर्मलता के लिए दो संतों ने संघर्ष करते हुए अपने शरीर का त्‍याग किया है।

काशी में शोक की लहर

वाराणसी में उनके सहयोगियों को जानकारी होते ही शोक की लहर दौड़ गई। गंगा की अविरलता की मांग को लेकर वह बीते 22 जून से ही अनशन पर चल रहे थे। इस बाबत उन्‍होंने पीएम काे एक खुला खत भी लिखकर गंगा को स्‍वच्‍छ बनाने की मांग की थी और न माने जाने पर वह गंगा दशहरा से अनशन पर बैठ गए थे। इसके बाद उनके साथ सहयोगियों ने भी गंगा आंदोलन के लिए सक्रियता दिखाई मगर लंबे समय से स्‍वास्‍थ्‍य ठीक न होने की वजह से उनको अस्‍पताल में बीते दिनों भर्ती कराया गया था। उन्हें श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए गुरुवार की शाम छह बजे पुराना अस्सी घाट पर एक सभा का भी आयोजन किया गया है।  


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दो और संत भी गंगा के लिए दे चुके हैं जान

स्‍वामी सानंद के निधन से पूर्व भी गंगा को प्रदूषण से मुक्‍त करने और इसकी अविरलता के लिए संघर्ष होता रहा है। गंगा को टिहरी बांध के ही अविरल करने के लिए लगभग पांच वर्ष तक लगातार अनशन करने वाले महाश्‍मशान यानि मणिकर्णिका घाट के पीठाधीश्‍वर बाबा नागनाथ का वर्ष 2014 में निधन हो चुका है। बाबा नागनाथ के काशी में निधन के बाद से ही स्‍वामी सानंद गंगा की अविरलता के लिए संघर्ष की पहचान बन गए थे। हालांकि इससे पूर्व भी उत्‍तराखंड के संत स्‍वामी निगमानंद भी गंगा को प्रदूषण से मुक्‍त करने के लिए उपवास कर चुके हैं। स्‍वामी निगमानंद ने गंगा को प्रदूषण से मुक्‍त करने के लिए लंबी लड़ाई भी लड़ी। आखिरकार वर्ष 2011 में उन्‍होंने भी गंगा के लिए संघर्ष करते-करते दम तोड़ दिया था।

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Author: Web_Wing

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